बागेश्वर झूला पुल जीर्णोद्धार की लंबे समय से उठ रही मांग आखिरकार पूरी होने जा रही है। बागेश्वर जिले की पहचान और धरोहर माने जाने वाले 113 साल पुराने ऐतिहासिक झूला पुल के नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस पर फैसला लिया गया है। इस बागेश्वर झूला पुल जीर्णोद्धार के लिए करीब 180.63 लाख रुपये (1.80 करोड़) की धनराशि मिसिंग लिंक फंड से स्वीकृत की जाएगी। यह जानकारी स्थानीय प्रशासन ने दी है।
113 साल पुरानी धरोहर को मिलेगा नया जीवन
यह झूला पुल वर्ष 1912 के आसपास अंग्रेजी शासनकाल में बनाया गया था। तब से यह स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही का प्रमुख साधन बना हुआ है। मगर समय बीतने के साथ पुल की हालत जर्जर हो गई। लकड़ी और लोहे के हिस्सों में जंग लगने और टूट-फूट बढ़ने से लोग यहां से गुजरने में असुरक्षित महसूस करने लगे थे। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने लंबे समय से बागेश्वर झूला पुल जीर्णोद्धार की मांग उठाई थी।
धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से अहम
51 मीटर स्पान वाला यह ऐतिहासिक पुल बागनाथ मंदिर, सरयू और गोमती नदी संगम क्षेत्र को नगर से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि बागेश्वर झूला पुल जीर्णोद्धार न केवल सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तरायणी मेले में हजारों श्रद्धालु इस पुल से होकर गुजरते हैं। इसके नवीनीकरण के बाद पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां खिंचे चले आएंगे।
व्यापारियों को भी मिलेगा लाभ
नगर पालिका क्षेत्र के व्यापारी वर्ग के लिए भी यह निर्णय राहत लेकर आया है। पुल की खराब स्थिति के कारण पिछले कई सालों से व्यापारियों को सामान ढोने में दिक्कतें हो रही थीं। अब बागेश्वर झूला पुल जीर्णोद्धार के बाद व्यापार सुचारू रूप से चल सकेगा।
प्रशासन और जनता की प्रतिक्रिया
बागेश्वर जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने कहा कि जैसे ही धनराशि जारी होगी, जीर्णोद्धार कार्य को तेजी से शुरू कराया जाएगा और तय समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय जानकारों और व्यापार संघ ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि बागेश्वर झूला पुल जीर्णोद्धार न केवल तकनीकी और सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी कदम है बल्कि यह बागेश्वर की सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पहचान देगा।
Pahadi Shuvidha की राय
हमारी वेबसाइट Pahadi Shuvidha के अनुसार, 113 साल पुराने इस झूला पुल का जीर्णोद्धार बागेश्वर की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और स्थानीय संस्कृति के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियां अपनी विरासत से भी जुड़ सकेंगी।
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