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देहरादून दशहरा 2025: बारिश ने डाला खलल, फिर भी रावण दहन में सीएम धामी की मौजूदगी से गूंजे जय श्रीराम के नारे

देहरादून दशहरा 2025

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उत्तराखंड में विजयादशमी के पर्व पर दशहरा की धूम रही, लेकिन मौसम ने इसमें थोड़ा खलल डाला। देहरादून के परेड ग्राउंड में मुख्य आयोजन के दौरान रावण दहन से ठीक पहले बारिश शुरू हो गई।

फिर भी, उत्साह कम नहीं हुआ और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां 121 फीट ऊंचे रावण के पुतले को श्रीराम के अग्निबाण से जलाया गया, जो अहंकार और बुराई के अंत का प्रतीक बना।

प्रदेश भर में हरिद्वार समेत कई जगहों पर बारिश ने रावण दहन को प्रभावित किया, लेकिन लोगों का जोश बरकरार रहा।

घटना का विवरण

देहरादून दशहरा 2025 के मुख्य कार्यक्रम में परेड ग्राउंड पर भव्य आयोजन हुआ। बारिश हल्की होने के बाद सीएम धामी पहुंचे और पहले लंका दहन किया गया, उसके बाद रावण का पुतला जलाया गया।

लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए और आतिशबाजी का आनंद लिया। हालांकि, देहरादून दशहरा 2025 में बारिश के कारण कुछ देरी हुई, लेकिन यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने में सफल रहा।

हरिद्वार में भी इसी तरह बारिश ने कार्यक्रम को प्रभावित किया, लेकिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुटे।

सीएम धामी का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून दशहरा 2025 के मौके पर कहा कि आज विजयादशमी पर भगवान इंद्र भी हमें आशीर्वाद दे रहे हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि हर साल रावण को बुराई, अन्याय और अहंकार के प्रतीक के रूप में जलाया जाता है। हमें भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिन्होंने तमाम कठिनाइयों का सामना किया लेकिन कभी अपने पथ से नहीं डिगे।

राम का जीवन हमें करुणा, प्रेम और मर्यादा सिखाता है। देहरादून दशहरा 2025 पर हम सभी को विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए।

सीएम ने आगे कहा कि दशहरा हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें धर्म, सत्य और मर्यादा का महत्व बताता है।

यह त्योहार रावण जैसे अहंकारी के अंत की याद दिलाता है और हमें सिखाता है कि अधर्म और अहंकार की हार निश्चित है। रावण के पास अपार शक्ति और धन था, लेकिन उसके अहंकार ने उसे नष्ट कर दिया।

इसलिए, हमें न केवल पुतला जलाना है, बल्कि अपने अंदर की बुराइयों को त्यागकर सत्य और मानवता की राह पर चलना है।

प्रभाव और महत्व

देहरादून दशहरा 2025 ने लोगों को एकजुट किया और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। बारिश के बावजूद कार्यक्रम सफल रहा, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक मजबूती को दर्शाता है। यह त्योहार हमें जीवन में संतुलन और नैतिकता की याद दिलाता है।

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