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उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं की पोल खुली: रिखणीखाल और धुमाकोट कैंप में जनता को मिली सिर्फ Paracetamol

उत्तराखंड स्वास्थ्य सेवाएं

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राज्य के गठन को 25 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लोगों को आयोजन और मेडिकल कैंप पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जिससे उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं अब भी सवालों के घेरे में हैं। यह हालात जनता के सामने तब आए जब 20 सितंबर 2025, शनिवार को धुमाकोट और रिखणीखाल में लगाए गए स्वास्थ्य कैंप में मरीजों को ज्यादातर जगह सिर्फ Paracetamol देकर घर भेज दिया गया। हालांकि इससे पहले भी कम्पो का आयोजन कई बार हो चुका है। 

उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं से जनता की उम्मीद टूटी

लोग दूर-दूर से टैक्सियों को बुक करके उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं कम्पो मे पहुचे थे, उम्मीद की जा रही थी कि उन्हे उचित इलाज मिलेगा। लेकिन जब ज्यादातर बुजुर्ग मरीजों को केवल Paracetamol की गोली देकर लौटा दिया गया। फिर जनता ने इसे मजाक करार दे दिया। सवाल यह है कि अगर यही दवा देनी थी, तो फोन पर डॉक्टर से बात करके भी यह इलाज हो सकता था।

उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं

सोशल मीडिया बनाम जमीनी सच्चाई

सोशल मीडिया पर जहां सरकार की उपलब्धियों के पुल बांधे जा रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। इस मुद्दे को रिखणीखाल जाकर सामने लाने का काम किया कुलदीप रावत (पहाड़ों का राही) ने। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि जब तक उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओ पर कमियों को उजागर नहीं किया जाएगा, तब तक सुधार की उम्मीद करना मुश्किल है।

लाखों का खर्च, लेकिन नतीजा शून्य

पहाड़ों में इन दिनों जगह-जगह पर मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन कैंपों पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। लेकिन जब जनता को 10 रुपये की दवा देकर घर भेज दिया जाए, तो यह खर्च सिर्फ खानापूर्ति लगता है।

रिखणीखाल और धुमाकोट की स्थिति

  • रिखणीखाल स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और महिला सर्जन मौजूद थीं, लेकिन मरीजों को यह कहकर लौटा दिया गया कि सिर्फ चेस्ट का एक्स-रे होगा, बाकी जांच नहीं।
  • धुमाकोट स्वास्थ्य केंद्र में विकलांगों के प्रमाण पत्र बने। लगभग 50–55 विकलांगों के प्रमाण पत्र जारी किए गए, लेकिन बुजुर्ग और अन्य मरीज घंटों इंतजार करने के बाद भी उचित इलाज से वंचित रहे।
उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं

जनप्रतिनिधियों का सहयोग

इस दौरान रिखणीखाल ब्लॉक स्तर के जनप्रतिनिधि—ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत प्रतिनिधि—वास्तव में जनता के साथ खड़े दिखे। उनकी सक्रियता की सराहना की जा रही है।

जनता के मन में सवाल

यहा की जनता का कहना है कि सरकार स्कीम तो निकाल देती है लेकिन उनसे जुड़ी हुई समस्याओ का समाधान उन्हे नहीं मिल पाता है। ऐसे मे जनता का सरकार के खिलाफ एक ही सवाल रहता है? कि उत्तराखंड वासियों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं जो ऐसी सेवा है जिससे उत्तराखंड का पलायन टिका हुआ है।

पहाड़ी सुविधा की राय

पहाड़ी सुविधा का मानना है कि उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं लगाने से कुछ नहीं होगा, बल्कि जब तक उन सेवाओ से संबधित समस्या का समाधान ढूंढकर जनता तक समय पर पहुचाई जा सके। जब तक उत्तराखंड मे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक पहाड़ों में रहने वाली जनता को हर बार निराशा ही मिलेगी।

उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं – FAQ

1. उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं क्यों चर्चा में हैं?

पहाड़ों में मेडिकल कैंप लगाए तो जाते है लेकिन उत्तराखंड के मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता। अधिकतर कम्पो मे को सिर्फ Paracetamol देकर लौटा दिया गया।

2. रिखणीखाल स्वास्थ्य केंद्र में क्या सुविधाएं दी गईं?

रिखणीखाल स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर मे डॉक्टर उपलब्ध तो थे लेकिन Equipment मौजूद न होने से डॉक्टर सिर्फ चेस्ट का एक्स-रे करा रहे थे। बाकी जांच और इलाज नहीं किया जाएगा।

3. धुमाकोट स्वास्थ्य केंद्र में क्या हुआ?

धुमाकोट स्वास्थ्य केंद्र में विकलांगों के प्रमाण पत्र बनाए जिसमे लगभग 50–55 प्रमाण पत्र बने, जो सरकार कि अच्छी बात भी थी, लेकिन जो मरीजों दूर दराज से आए थे उन्हे लंबा इंतजार करने के बाद भी उचित इलाज नहीं मिल पाया।

4. उत्तराखंड मेडिकल कैंप में क्या खामियां सामने आईं?

उत्तराखंड मेडिकल कैंप पर सरकार लाखों रुपये खर्च कर तो देती है, लेकिन मरीजों को सिर्फ 10 रुपये की दवा देकर घर भेज दिया जाता है। यहा की जनता भोली भाली होने के कारण भी उनके साथ अन्याय हो रहा है , साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर व्यवस्था से जनता को और भी बेवकूफ बनाया जा रहा है।

5. पहाड़ों की स्वास्थ्य समस्या का समाधान क्या है?

पहाड़ों पर जब तक सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, दवाइयां और सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती। तब तक कुछ समाधान भी नहीं मिलेगा। सिर्फ मेडिकल कैंप लगाने से जनता को सही मायने मे समाधान नहीं मिलेगा।

6. उत्तराखंड की जनता क्या चाहती है?

जनता चाहती है कि सरकार यहा के लोगों को बेवकूफ बनाना बंद करे। जो मैदानी क्षेत्रों मे स्वास्थ्य व्यवस्थाये है उन्ही की तरह ही पहाड़ों पर व्यवस्था होनी चाहिए।

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