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जानिए नैनीडांडा विकासखंड के इतिहास, पर्यटन स्थल, मंदिर और प्राकृतिक खूबसूरती के बारे मे

नैनीडाण्डा

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नैनीडांडा (Naninidanda) विकासखंड प्राचीन काल से ही प्राकृतिक सुन्दरता एवं स्वच्छ वातावरण की दृष्टि से अत्यन्त मनमोहक क्षेत्र रहा है। नैनीडांडा जहा एक छोटा सा बाजार भी है जो जंगल के बीच मे ही बसा हुआ है। इस जगह पर ज्यादातर कुलै ( चीड़ का पेड़) और बांज के है। जिससे यहा गर्मी हो या सर्दी ठंड बराबर ही रहती है। नैनीडाण्डा विकासखंड 15 ब्लॉक वाला जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड राज्य मे स्थित है। इन्ही 15 विकासखण्ड मे से एक नैनीडांडा है, जो सीमांत क्षेत्र में बसा हुआ है।

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रामनगर और कोटद्वार दोनों गढ़वाल के तराई वाले क्षेत्र है। जिससे आप इस विकास खण्ड मे प्रवेश कर सकते है।

कोटद्वार से लगभग 100 किमी० रामनगर से 60 किलोमीटर और पौड़ी जिला मुख्यालय से लगभग 160 किलोमीटर पर स्थित है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

नैनीडाण्डा विकासखंड के कुछ ऐसे ऐतिहासिक स्थान है, जो कई वर्षो से अभी तक चलते आ रहे है। कुछ पांड गाँव के पुराने स्थानीय बुजुर्गो से ज्ञात हुआ कि पंडाओं द्वारा यहा के घनघोर जंगलो में उन्होंने 12 वर्ष के दौरान अपना कुछ समय बिताया था। आज भी उन जगलो में पंडाओं के प्रमाण भी मिलते है। इसी वजह से इस गाँव का नाम पाण्ड भी पड़ा।

यह भी कहा जाता है कि पांडव गर्जिया देवी से दुर्गा देवी होते हुए डूंगलगढ़,जमूण, तैड़िया, दुमुण्ड,राणा, पाण्ड पातल जैसे घनघोर जंगलों से होकर यहा थोड़ा-थोड़ा समय बिताया था। इसी के चलते डूंगलगढ़ नामक जगह पर एक बहुत बड़ा पत्थर है। उस पत्थर जो निशान आज भी दिखाई देते है। कहा जाता है कि वो भीम के हाथ का निशान है ।

इसका इतिहास गुजडू़ गढी पट्टी के किनगोडी़खाल की एक चोटी से जुड़ा हुआ है। जिसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा है। उस समय राजकुमार नकुल ने शांति के लिए इस चोटी का निर्माण करवाया था।

यह गढ़वाल के 52 गढो़ में से एक गढ़ है, जो बाद में कत्यूरी, तीलू रौतेली, रोहिल्ला, पवार वंश, एवं गोरखा शासन के अधीन रहा। उस समय के निर्मित किले के खण्डहर और गुफायें पानी के सीडीदार कुँए आज भी यहा देखने को मिलते है। वर्तमान में यह पर्यटन का मुख्य केंद्र बन सकता है।

नैनीडांडा विकासखंड

माँ बूंगी डाण्डा मंदिर का इतिहास और यहा के सुंदर नजारे

ऐसे ही लोक जनमानस से पता चलता है कि कई सौ वर्ष पहले बूंगी डाण्डा के पर्वत से ज्वालामुखी लावा निकलता था। इस ज्वाला को शांत करने के लिए प्राचीन काल में यहां के ग्राम वासियों ने पंचनाम देवताओं की आराधना की तब मां दुर्गा भवानी पंचनाम देवताओं की अगवानी बनकर इस क्षेत्र में प्रकट हुई। और ज्वालामुखी की ज्वाला को शांत कर बूंगी की उस ऊंची चोटी पर अपने भक्तों की रक्षा के लिए एक प्रहरी के रूप में चारों दिशाओं में नजर रखने के लिए विराजमान हो गई।

उस लावे के प्रमाण है कि आज भी निकटवर्ती गांवों में जले पत्थर दिखाई देते हैं। आप जब माँ बूँगी देवी के दर्शन करने यहा जाते है तो रास्तों मे इन्ही लावों के बड़े-बड़े पत्थर यहा अभी भी मौजूद है। लगता है जैसे ये पत्थर गल रहे तो। वाकई मे यह नजारा देखने लायक है।

मै तो आपको बिल्कुल ही बोलूँगा कि आप लोगों को इस जगह पर एक बार जरूर जाना चाहिए। इस चोटी से गढ़वाल कुमाऊं की अनेक ऊंची-ऊंची पहाड़ियां व हिमालय पर्वत दिखते हैं।

भौगोलिक स्थिति

इसकी पूरब दिशा में कुमाऊँ मण्डल, के अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक से सटा हुआ है, जो पश्चिम में पौड़ी गढ़वाल जिले के रिखणीखाल विकास खण्ड, और उत्तर में बीरोंखाल विकासखणड, दक्षिण दिशा में जिला नैनीताल से इसकी सीमाएं लगी हुई है। जो कि कार्बेट नेशनल पार्क के सुंदर और घने जंगलों से घिरा हुआ है।

नैनीडांडा ऊंचाई लगभग समुद्र तल से 1,700 मीटर (5,761 फीट) पर स्थित है। नैनीडांडा का मौसम लगभग ठंड का ही रहता है।

नैनीडांडा विकासखंड

पंचायतीराज की संरचना

यहा का विधानसभा क्षेत्र लैंसडौन है। नैनीडांडा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले 10 न्याय पंचायतें के साथ 88 ग्राम पंचायत है। इस क्षेत्र में 26 क्षेत्र पंचायत और 3 जिला पंचायत की सीटें है। इसके बगल वाले गाँव का नाम उटिण्डा है, जहा पर नैनीडांडा ब्लॉक का मुख्यालय स्थित है। साथ ही यहा पर क्षेत्रीय जनता कि सुविधा के लिए भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का बैंक और ATM साथ ही ग्रामीण बैंक दोनों यहा पर है।

इसकी सरचना चार पट्टियों इडिया कोट तल्ला, बूंगी , बिजलोट, एवं गुजडू़ से हुई है। विकास क्षेत्र का मुख्यालय नैनीडाण्डा में स्थित है।

पर्यटन एवं धार्मिक स्थल

पर्यटन उत्तराखण्ड राज्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क नैनीडाण्डा विकास क्षेत्र से सटा हुआ है जो पर्यटकों को यहा खूब आकर्षित भी करता है।

नैनीडाण्डा विकासखंड के गुजडू़ गढ़ी (किनगोडी़खाल) दीवाडाण्डा, सल्डमहादेव, नैनीडाण्डा, दिगोलीखाल, बूंगी अपोलासेरा तोल्यों डाण्डा, आसौंगाड इत्यादि ऐसे क्षेत्र हैं। जहां पर्यटन के हिसाब से अत्यंत खूबसूरत हैं।

इसके साथ ही माँ बूंगी मंदिर हल्दूखाल, नैनादेवी नैनीडाण्डा, धूमादेवी धुमाकोट, सल्डमहादेव व अपोला सेरा के महादेव मंदिर, अपोला गांव का बद्रीनाथ मंदिर, दीबा माँ धूमकोट आदि ऐसे प्राचीन मंदिर है, जिससे आज भी यहा कई श्रद्धालु भारी संख्या मे आते है।

रहने और खाने कि ब्यवस्था

पर्यटकों के ठहरने व खाने के लिए हर जगह बाजारों में होटल रेस्टोरेंट एवं होमस्टे खुले हुए हैं।

  • रुद्राक्ष होम स्टे
  • नैनी हिल होमस्टे नैनीडाण्डा
  • मैदावन कार्बेट होमस्टे खदरासी
  • रैबाशा होम स्टे
  • आँचल होमस्टे धुमाकोट
  • सदानन्द होमस्टे जडा़ऊखान्द
  • हिमालयानंद होमस्टे किनगोडी़खाल
  • शान्ति हिमालयन रिजॉर्ट दिगोलीखाल
  • श्रीविला रिजॉर्ट दिगोलीखाल
  • इन्दु होमस्टे दिगोलीखाल
  • चैताधार मल्ला मे थ्री स्टार होटल

ये कुछ चुनिंदा होम स्टे है। दिगोलीखाल क्षेत्र से कुमाऊं स्थित मानिला देवी, गुजडू़गढी़ देवी, दीवा मंदिर भौन देवी और सुंदर हिमालय के दर्शन होते हैं |

नैनीडाण्डा

प्रमुख कार्यालय एवं शिक्षण संस्थान:

विकासखंड नैनीडांडा में कई जगहों पर शिक्षण संस्थान बने हुए है। जिनमे प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय है। कुछ ने बेहतर शिक्षण के लिए निजी संस्थान खोले हुए है। जिसमे पैराडाइज पब्लिक स्कूल है, जो नैनीडांडा से 25 किमी की दूरी पर स्थित है।

यहा के कॉलेज

  • पटौटिया डाण्डा का डिग्री कॉलेज
  • सल्ड महादेव में आईटीआई संस्थान
  • पॉलीटेक्निक बीरोखाल (यह प्रशिक्षण केंद्र बीरोखाल ब्लॉक मे आता है)

नैनीडांडा विकासखंड

यहा के प्रमुख कार्यालय

  • विकासखण्ड कार्यालय – नैनीडांडा
  • खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय – नैनीडांडा
  • स्वास्थ्य केंद्र नैनीडांडा- नैनीडांडा
  • अधिशासी अभियंता विद्युत् वितरण खंड – नैनीडांडा
  • कृषि विभाग – धुमकोट
  • उप जिलाधिकारी कार्यालय – धुमकोट
  • तहसील मुख्यालय – धुमकोट
  • पुलिस थाना – धुमकोट

प्रमुख व्यक्तित्व

विकासखण्ड नैनीडाण्डा में अनेक वीर महापुरुषों ने जन्म लिया है। जिनकी अनेक शौर्यगाथाएं रही हैं। अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पैदा हुए जिनमें प्रमुख:

  • शीशराम पोखरियाल (बराथ)
  • सुमन लता भदोला (जगदेई)
  • मखराम बलोधी (देवलाड़)
  • अंबिका प्रसाद ( भौन)
  • नारायण सिंह (परसोली )
  • पान सिंह (आसौं बाखली)

वहीं उत्तराखण्ड राज्य में कुछ ऐसे आंदोलनकारी रहे जिन्होंने उत्तराखंड राज्य बनने में अपना खासा योगदान दिया। जिनमे से

  • राजेश रावत (परसोली )
  • आनंद सिंह गुसांई (कसाना) प्रमुख रूप से रहे हैं।

वर्तमान में श्रीमान मंगेश घिल्डियाल IAS (वर्तमान में PMO कार्यालय दिल्ली में कार्यरत) ग्राम टाण्डयूँ, ले० ज० श्रीमान तेजपाल सिंह रावत (पूर्व कैबिनेट मन्त्री) ग्राम परसोली, इन्जीनियर श्रीमान गजेन्द्र सिंह रावत (उद्यमी दिल्ली ग्राम काँखो ) आदि व्यक्ति वर्तमान मे युवाओं के प्रेरणास्रोत है।

नैनीडाण्डा के प्रमुख बाजार

यहाँ कुछ स्थानीय छोटे-छोटे बाजार है, जिनमे कुछ प्रभावशाली भी है। जिनमे से शंकरपुर, सल्डमहादेव, नैनीडाण्डा, धुमाकोट, हल्दूखाल, भौन, जडाऊखान्द, अदालीखाल, खिरैरीखाल, किनगोडीखाल, दिगोलीखाल, गौलीखाल आदि है। इन बाज़ारो से स्थानीय लोग अपनी रोजमर्रा का सामान की खरीदारी करते है।

सीजन आने पर इन मार्केटों में अलग-अलग जगहों पर मेले लगते रहते है। इनमे से धुमाकोट का महाकौथिग मेला आकर्षक का केंद्र बना रहता है, जिसमे गढ़वाली परम्परा, संस्कृति और कुछ खास लोकल कलाकारों को देखने का मौका मिलता है। जिसका श्रेय कुलदीप रावत को जाता है,जो एक समाज सेवी भी है। इन्हे “पहाड़ो का राही” के नाम से भी जाना जाता है।

प्रमुख व्यवसाय

हालांकि आवश्यक सुविधाएं न होने के कारण अधिकांश युवा पीडी रोजगार हेतु महानगरों मे पलायन कर चुकी है। ज्यादातर यहा के लोग पशुपालन में

  • गाय
  • भैंस
  • भेड़
  • बकरी
  • मुर्गीपालन
  • मच्छी पालन पर ही निर्भर है।

जबकि यहा खेती मे प्रमुख रूप से

  • मण्डुवा
  • झुंगोरा
  • गहत
  • मिर्च
  • भट्ट
  • मास
  • मुंगरी ( मक्का, भुट्टा इन नमो से भी जाना जाता है)

साथ ही प्रसिद्ध पहाड़ी ककड़ी जो आजकल सितम्बर से नवम्बर के बीच ही होती है, प्रमुख रूप से इसका उत्पादन किया जाता है, जो कई लोगो का एक आय का श्रोत भी बन चुका है।

कृषि के क्षेत्र मे जो गाँव अव्वल है वो प्रमुख रूप से

  • नलाई
  • कमन्दा
  • डाण्डातोली
  • खदरासी
  • ज्यून्दाल्यूँ
  • बमणीसैण
  • आसौंगाड़
  • कुलाईखांद
  • पोलासेरा आदि गाँव हैं।

इन गाँवों ने अभी भी पहाड़ की धरोहर को बचा के रखा हुआ है।

यातायात व सड़क मार्ग

विकासखण्ड नैनीडाण्डा से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रामनगर व कोटद्वार है। ये नैनीडाण्डा के प्रवेश द्वार भी कहलाते है। आप अगर नैनीडांडा घूमने का प्लान कर रहे है तो रामनगर से यूजर्स व उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसें और कोटद्वार से भी जी एम ओ व उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसे चलती रहती है।

प्रमुख नदियाँ

नैनीडाण्डा विकासखंड में कुछ छोटी-छोटी नदिया निकलती है जिनमे प्रमुख देवलगढ़, बदनगढ़, कली गाड़, बाणगंगा, मन्दाल जैसी नदिया है, और कुछ छोटे-छोटे गदेरे है।

नैनीडाण्डा क्षेत्र से गुजरने वाली नदिया देवलगढ़ नदी काफलागैर से एंव बदनगढ़ नदी सौंफखाल दीवा मन्दिर के पास होकर गुजराती है, जो मरचूला मे जाकर रामगंगा नदी मे मिलती है। पौडी अल्मोडा की सीमा रेखा पर बदनगढ़ नदी निकलती है। जो सल्डमहादेव मे जाकर मिल जाती है। मैदावन खदरासी का क्षेत्र है जहा पर मन्दाल नदी बहती है।

स्थानीय मेले व त्योहार

इस क्षेत्र में जगह-जगह पर छोटी-छोटी पहाड़ियों, नदियों के किनारे, ऊंची चोटियों व गांवों के ऊपर अनेक मंदिर देवालय शिवालय आदि धार्मिक स्थल मौजूद हैं। इन्हीं के कारण इन स्थानों में मेलों का आयोजन होना भी स्वाभाविक है।

जिनमे प्रमुख रूप से

  • गौलीखाल का बसंत पंचमी मेला
  • नैना देवी का मेला
  • आसौंगाढ़ महोत्सव
  • धुमाकोट महोत्सव
  • अपोला का बदरीनाथ मन्दिर मेला
  • सल्डमहादेव का उत्तरायणी व शिवरात्रि मेला
  • धूमा देवी का मेला
  • बूंगीदेवी महोत्सव
  • गुजडू़गढी कलश यात्रा

पौराणिक कथाओ को जीवित रखने के लिए रामलीला का आयोजन

  • धुमाकोट
  • किनाथ गाँव
  • दिगोलीखाल
  • नैनीडाण्डा
  • हल्दूखाल

इन स्थानों पर स्थानीय कलाकारों द्वारा रामलीला खेली जाती है। कुछ क्षेत्रो में हरेला, उत्तरायणी, पंचमी, बैशाखी, घी सक्रांति, फूल सक्रांति आदि त्योहार मनाये जाते है।

बोली भाषा

इस पूरे क्षेत्र में गढ़वाली बोली जाती है। कुछ क्षेत्र ऐसे है जो कुमाऊ से जुड़े होने के कारण वहा की बोलचाल और भाषा कुँमाऊनी टच में हो गए। कुमाऊ के सम्पर्क में होने से कुछ की नाते रिश्तेदारी भी कुमाऊ क्षेत्र में ही आते है। जिसके कारण थोडा बहुत कुमाऊं और गढ़वाल की संस्कृति को इन क्षेत्र में देखा जा सकता है।

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निष्कर्ष:

इस प्रकार नैनीडाण्डा विकासखण्ड हर दृष्टि से सम्पन्न समृद्ध एवं खुशहाल है। लेकिन चिकित्सा, रोजगार और शिक्षा का अभाव आज भी नई पीडी को पलायन पर मजबूर कर देती है। जिसे रोकने के लिए शासन प्रशासन को सकारात्मक पहल करने की बहुत आवश्यकता है। जिससे कि विषम परिस्थितियों मे भी विकास खण्ड नैनीडाण्डा की ग्रामीण जनता या अन्य क्षेत्र का अपना खुशहाल जीवन यापन कर सकें।

दोस्तों यह लेख पहाड़ी सुविधा (Pahadi Shuvidha) ने सतीश बस्नुवाल की मदद से लिखा गया है,जो ग्राम कोटापिंजोली, दिगोलीखाल के निवासी है। हम ऐसे ही अनछुए आर्टिकल को आपके मध्य लाते रहते है। अगर यह जानकारी अभी तक आप लोगों को पता नहीं थी तो इसमे जरूर Comment करके हमे जरूर बताए। और जिन्हे पता नहीं है उन लोगों को शेयर जरूर करे।

धन्यवाद

अक्सर नैनीडाण्डा से संबंधित पूछे जाने वाले कुछ सवाल

Q.नैनीडांडा के अंतर्गत कितने ब्लॉक है? 

नीडाण्डा विकासखंड 15 ब्लॉक वाला जिला पौड़ी गढ़वाल है जो उत्तराखंड राज्य मे स्थित है।

Q.नैनीडांडा विकासखंड मे कुल कितने क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की सीटें है?

इस क्षेत्र में 26 क्षेत्र पंचायत और 3 जिला पंचायत की सीटें है।साथ ही इसके अंतर्गत आने वाले 10 न्याय पंचायतें के साथ 88 ग्राम पंचायत है।

Q.नैनीडांडा विकासखंड मे कितने पट्टीया है ?

नैनीडांडा ब्लॉक के अंतर्गत चार पट्टियों इडिया कोट तल्ला, बूंगी , बिजलोट, एवं गुजडू़ है। जिससे इस ब्लॉक कि सरचना भी हुई है।

Q.क्या नैनीडांडा विकासखंड के अंतर्गत रहने खाने की व्यवस्था है?

जी हा यहा पर्यटकों के ठहरने व खाने के लिए हर जगह बाजारों में होटल रेस्टोरेंट एवं होमस्टे खुले हुए हैं।

  • रुद्राक्ष होम स्टे
  • नैनी हिल होमस्टे नैनीडाण्डा
  • मैदावन कार्बेट होमस्टे खदरासी
  • रैबाशा होम स्टे
  • आँचल होमस्टे धुमाकोट
  • सदानन्द होमस्टे जडा़ऊखान्द
  • हिमालयानंद होमस्टे किनगोडी़खाल
  • शान्ति हिमालयन रिजॉर्ट दिगोलीखाल
  • श्रीविला रिजॉर्ट दिगोलीखाल
  • इन्दु होमस्टे दिगोलीखाल
  • चैताधार मल्ला मे थ्री स्टार होटल

Q.पटोटिया डाण्डा का डिग्री कॉलेज कहा है?

यह कॉलेज नैनीडांडा के अंतर्गत पटोटिया गाँव मे आता है।

Q.नैनीडांडा मे कौन- कौन से मेले लगते है?

यहा के प्रमुख मेले

  • नैना देवी का मेला
  • धुमाकोट महोत्सव
  • अपोला का बदरीनाथ मन्दिर मेला
  • सल्डमहादेव का उत्तरायणी व शिवरात्रि मेला
  • धूमा देवी का मेला
  • गुजडू़गढी कलश यात्रा
  • जड़ाऊखाँद का मेला
  • हलदू खाल का मेला
  • अदालिखाल का मेला
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