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किसी ‘खजाने’ से कम नहीं ये उत्तराखंड के ये 5 हिल स्टेशन जानें इसके बारे में

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आपने पैसे तो बहुत कमा लिए है लेकिन आप पहाड़ पर आने की सोच रहे हो और चाहते हो की नैनीताल या मसूरी घुमने जाए तो रुकिए जरा आप को उत्तराखंड के ये 5 हिल स्टेशन कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताते है जो शायद आप असल जिन्दगी में नहीं सुना हो। आखिर ऐसे कौन से ऐसी जगहे है जो पहाड़ी सुविधा आपको बताने जा रहा है।

पंगोट की खास बात

  • पंगोट में आप 300 से ज्यादा चिडियों की प्रजाति देखी  जा सकती है। इसीलिए पंगोट को Bird watching के लिए यहाँ जन्नत माना जाता है।
  • यहाँ ढेरो जंगली जानवरों की प्रजातिया भी देखी जा सकती है।
  • फोटोग्राफ़र और चिडियों के देखने के खौकीन वालो के लिए यह डेस्टिनेशन Perfect है।
  • अगर आप Hiking और Camping का शौक़ीन रखते हो तब भी यह जगह बेहतरीन होने वाली है।
  • नैनीताल के आस पास Adventure की एक्टिविटी के लिए ये Perfect जगह है। यहाँ से आप 5 किलो की दूरी पर नैना पीक का ट्रैक भी कर सकते हो।

उत्तराखंड के ये 5 हिल स्टेशन

नैना पीक का ट्रैक

यह भी नैनीताल का एक ख़ूबसूरत दिखने वाला वव्यू पॉइंट भी है। यह जगह भी पंगोट की खूबसूरती में चार – चाँद लगा देती है। अगर आप अपने पार्टनर के साथ रोमाटिक ट्रेवल प्लान करना चाहते हो या फिर एक छोटे से ग्रुप में Adventure Trip करने की सोच रहे हो तो पंगोट आपके लिए एक Perfect Gateway हो सकता है।

आने का सही समय 

अगर गर्मी में भी आप ठण्ड का मज़ा लेना चाहते हो तो मार्च से जून के महीने में आ सकते हो

बर्फ देखने का सही समय

अगर आपने पहड़ो पर बर्फ गिरते हुए नहीं देखा है तो दिसम्बर से फरबरी के बीच आ सकते है

पहुचने का तरीका

  • अगर आप प्लेन से आ रहे हो तो नजदीकी एयर पोर्ट पन्त नगर है।
  • पन्त नगर से पंगोट लगभग 80 किमी है यहाँ से आप लोकल टैक्सी बुक करके पंगोट सीधे पहुँच सकते हो।
  • अगर आप टैक्सी बुक नहीं करना चाहते हो तो आप हल्द्वानी आकर नैनीताल तक पहुच सकते हो जो की पंगोट पास ही है।
  • अगर ट्रेन का सफ़र करना चाहते हो तो हल्द्वानी, काठगोदाम नजदीकी रेलवे स्टेशन है।
  • दिल्ली से यहा 350 किमी, 7 – 8 घंटे का रस्ता है। आप सीधे दिल्ली से अपनी गाडी में आराम से आ सकते हो।

रहने की ब्यवस्था

  • यहाँ रुकने के लिए सस्ते Homestay और होटल भी है।
  • अगर आप होटल या होम स्टे लेना नहीं चाहते हो तो आप कैम्पिंग भी कर सकते है।

दूसरी डेस्टिनेशन 

तो दोस्तों अब पंगोट के बाद जो जगह आती है वो अपने आप में पंगोट की तरह नेचर से भरा शांत जगहों में से है यहाँ इतिहास से कई पौराणिक चीजी जुडी हुयी है। जी हा यह जगह लोहाघाट है। पंगोट की तरह ही इस जगह का नाम भी आपने सुना ही होगा नहीं तो चलिए लोहाघाट के बारे में जानेते है कि हमें यहाँ क्यों जाना चाहिये।

उत्तराखंड के ये 5 हिल स्टेशन

इतिहास

पहले के समय में पहाड़ो पर राज करने वाले कत्युरी और चन्द्रराज वंशो की ये पंसदीदा वाली जगहों में से एक हुआ करती थी। किसी ज़माने में अंग्रेज भी इस ठंडी जगह के दीवाने थे। उन्होंने अपने लिए रहने के लिए कई जगहे बनायीं उनमे से एक Abat Mount के नाम पर अभि भी लोहाघाट में है। Abat Mount को अपने विंटेज चर्च और अग्रजो के ज़माने का Cottage के नाम से जाना जाता है।

लोहाघाट उत्तराखंड के चम्पावत जिले के लोहाघाट तहसील में पड़ता है। यह उत्तराखंड का एक पहाड़ी शहर है जो कुमाउनी क्षेत्र में आता है। यहाँ से लोहावती नदी लोहाघाट को और भी सुन्दर बनती है। अंग्रेजों के समय में यह जगह ब्रिटिश अधिकारियो का Summer Vacation हुआ करता था।

मायावती आश्रम

यह लोहाघाट के नज़दीक का आश्रम है जो की यहाँ का एक टूरिस्म का हिस्सा भी है। एक बार स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड के भ्रमण में आये तब उन्होंने सन् 1899 में इसकी स्थापना की। इसी जगह पर उन्होंने काफी समय भी बिताया था।

यहा के देवदार और उग के हरे – भरे जगलो से घिरा ये जगह प्रक्रति और प्रयावरण प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। लोहा नदी और यहाँ के छोटे – छोटे झरने इस जगह पर चार चंद लगाने का काम करतीं है।

यहाँ का खाना: कुमाऊ क्षेत्र में आने के कारण इस जगह पर कुमाऊनी स्वादिस्ट खाना खाने को मिल जाता है। लेकिन आप इस खाने का स्वाद नहीं भूल सकते।

उत्तराखंड के ये 5 हिल स्टेशन

ज्यादातर यहाँ खाने में यहाँ

  • भट्ट की चुटकानी
  • गहत की दाल
  • अल्लू की थिचोनी

यहाँ का जीवन : यहाँ ज्यादातर लोग खेती-किसानी व लोकल ब्यवसाय पर ही निर्भर रहते है। साथ ही ये जगह ख़ूबसूरत होने की वजह से लोग टूरिस्म से भी जुड़े है।

नयी झील से यहाँ का आकर्षण और भी बाढा है

हाल ही में यहाँ कोलीड़ेक नाम की झील टूरिस्ट को और आकर्षक कर रही है। यह झील इंसानों ने ही बनाया है जो की नैनीताल के झील जैसी है। क्यूंकि इस झील में भी आप वाटर एक्टिविटी कर सकते है जो नैनीताल के झीलों में कर सकते है। यहाँ के दीवार के पेड़ यहाँ की सुदरता को और निखारते है। वैसे भी देवदार के पेड़ कुदरती बहुत ही सुन्दर होते है।

ऐसा माना जाता है कि श्री कृष्ण ने इस जगह पर बाड़ा सुर नाम के राक्षस को हराया था। तब से इस जगह पर बाड़ा सुर पड गया। जो कि आज भी यहाँ पर एक किले के रूप में है। यहाँ से  30 किमी दूर श्यामाल ताल पहडियो के बीचो – बीच इस जगह की ख़ूबसूरती को खूब निखरता है।

रहने की ब्यवस्था

  • यहाँ की सबसे खास बात यह है की यहा रहने के लिए बेस्ट आप्शन सस्ते में मिल जाते है।
  • यहा सरकारी Guest House, KMVA Guest House है जिसमे आप बहुत ही कम दाम में यहा रुक सकते है।

घुमने का सही समय

      घुमने के लिए यहाँ सबसे अच्छा मार्च से जुलाई के बीच में रहता है। इन महीनो में यहा का तापमान 15 से 25 डिग्री रहता है। इसी वजह से यहा का मौसम बेहद सुहावना रहता है।

पहुचने का तरीका

  • लोहाघाट और दिल्ली के बीच की दूरी 400 किमी है जिससे यहाँ पहुचने में 8-10 घंटे लग सकते है।
  • यदि प्लेन से आ रहे हो तो नजदीकी एअरपोर्ट पन्त नगर है जहा से 175 किमी की दूरी से आप सीधे टैक्सी बुक कर लोहाघट आ सकते हो।
  • अगर टैक्सी बुक नहीं करनी हो तो पन्त नगर से हल्द्वानी, टनकपुर होते हुए लोहाघट पहुच सकते हो।

तीसरी डेस्टिनेशन 

दोस्तों यह तीसरी खुबसूरत जगह अपने खेतो के बारे में जाना जाता है। ये बिलकुल पहाड़ो के बीचों – बीच बसी एक घाटी है। हैरत की बात ये है की ये पहाड़ो पर नही है। इस घाटी का नाम सोमेश्वर है।

यह उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में बसा एक छोटा सा शहर है। यह शहर अल्मोड़ा से 40 किमी और कौसानी से 24 किमी की दूरी पर है। यह शहर अपने हरी – भरी वादियों और शिव भगवान को समप्रित सोमेश्वर मंदिर के लिए जाना जाता है।

सोमेश्वर के खेत ही यहा की खूबसूरती को निखरते है। यहाँ के लोग किसानी और खेती पर ही निर्भर रहते है। ये जगह शहर के शोर – सराबे और भीड़ – भाड़ वाली जगहों से दूर शांत जगह पर है और किसी भी प्रकृति प्रेमी को यही तो  चाहिए। चलिए पहाड़ी सुविधा के माध्यम से जानते है सोमेश्वर के बारे में।

उत्तराखंड के ये 5 हिल स्टेशन

कोसी और साई नदी के संगम पर बसी है सोमेश्वर घाटी। यहा के खेतो में बैठकर आपको जरूर लगेगा के शहर की चकाचौन्द से परे भी एक ऐसे दुनिया बसती है। कमाल की जगह है ताजुब की बात है कि यह घटी इतनी ख़ूबसूरत होने के बावजूद भी यह जगह ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है।

सोशल मीडिया से दूर यह गाँव : यहा की खास बात यह है कि  ये सोशल मीडिया से दूर  हिया  यहा सिर्फ आप और यहा के साधारण लोग जो यहा के दिनचर्या के बारे में आपको बताएँगे।

यहा कोई कोमेर्सिअल टूरिस्ट प्लेस नहीं है। आप यहा कुमाउनी संस्कृति को और करीब से देखने का मौका मिल सकता है। साथ ही उन प्रक्रति प्रेमियों के लिए भी खास जगह है जो प्रकृति को और ज्यादा Explore करना चाहते हो। जो Writers और Creators है उनके लिए यह जगह सबसे बेहतरीन होने वाली है।

यहाँ का खास सोमेश्वर मंदिर

चंद राजवंश के राजा ने यहा 10 वी और 11 वी शताब्दी में सोमेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया था। यहाँ महाशिव रात्रि के दिन भब्य मेले का आयोजन किया जाता है जो कि कुमाऊ की संकृति का एक अनूठा उदाहरन देखने को मिल जाता है। यह जगह बद्रीनाथ का रास्ता भी इसी गाँव से होकर गुजरता है लेकिन टूरिस्ट इस जगह पर बिना रुके ही आगे चले जाते है। यह एक Hidden Gem Place है।

सोमेश्वर, पंगोट और लोहाघाट की तरह प्रसिद्ध तो नहीं है लेकिन यहाँ की खूबसूरती इनसे कम भी नहीं है। यह इन दोनों के मुकाबले यह घाटी पर बसा है जो देखने में बहुत की ज्यादा खूबसूरत है। साथ ही मन को सुकून देने वाला पल भी। आप अगर यहा से 15 किमी आगे जाते है तो आपको गोमती नदी के किनारे पर बैजनाथ मंदिर भी देखने को मिल जाता है।

चौथी डेस्टिनेशन 

यह जगह भी काफी खूबसूरत है इस जगह को देखने के लिए अंग्रेज भी दीवाने हो गए थे। भारतीय टूरिस्ट भले यहा कम आते हो लेकिन अग्रेज यहा हर समय घुमने आते है इसीलिए भारतीयों के लिए यह जगह अभि तक Unexplorable है। इस जगह नाम ग्वालदम है।

ग्वालदम उत्तराखंड के गढ़वाल में पड़ने वाले चमोली जिले और कुमाऊ के बागेश्वर जिले के बीच में स्थित है। यहा से आप हिमालय को इतने पास पायेंगे कि बस कुछ देर चलकर इसे छू सकते है। यह जगह इतनी खूबसूरत होने के वजह से यहा टूरिस्टो का अकाल पड़ा रहता है।

अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया सरकारी गेस्ट हाउस:

शायद आधे से ज्यादा टूरिस्टो को इस जगह के बारे में पता नहीं है लेकिन अंग्रेज हर साल यहाँ गर्मियों की छुट्टिया बिताने जरूर आते है। उन्होंने 1890 में यहाँ एक सरकारी गेस्ट हाउस बनाया था। इस गेस्ट हाउस को आज वन विभाग की देख रेख में रखा गया है।

  • एक ज़माने में  ग्वालदम से ही सेब और आलू का ब्यापार किया जाता था। अंग्रेजों ने यहाँ से रूप कुण्ड के लिए एक टैग बनाया हुआ था।
  • यहाँ से 1.5 किमी की दूरी पर बुद्धिस्ट village भी है। यहाँ भगवान बुध के कई मुर्तिया भी रखी हुयी है। यह जगह एक दम शांत और मैडिटेशन के लिए perfect है।
  • ग्वालदम से आपको हिमालय की सबसे ऊँचे पहाड़ नंदा देवी, त्रिशूल और नन्दगुन्टी साफ दिखाई देते है।
  • यहाँ एक झील भी है जिसमे हिमालय का प्रतिबिम्ब इतना साफ दिखाई देता है की मनो हिमालय यही पर आ गया हो।
  • ज्यादातर यहा लोग अभी भी खेती करते है।
  • यह बॉर्डर पर होने के कारण कुमाऊ और गढ़वाली की संस्कृति और खान – पान का मिश्रण देखने को मिलता है।
  • यहाँ आकर आप ग्वालदम के सेब के बगीचों और देवदार के जंगलो के घूम सकते हो।
  • ग्वालदम की Popularity कम होने के बाबजूद भी कम बजट में यहाँ रहने को मिल जाता है।
  • आप यहा रात में जंगलो में कैम्पिंग भी कर सकते है। यहाँ होटल और होम स्टे कम दामो में मिल जाते है।

उत्तराखंड के ये 5 हिल स्टेशन

घुमने का सही समय

यहाँ पर हर मौसम ठंड ही रहता है। जब शहर की गर्मी आपको परेशान कर रही हो मार्च से जुलाई के माह में आना अच्छा रहता है।यहाँ बरसात में आने से परहेज करे। और हा अगर आपने पहाड़ी क्षेत्रो में बर्फ नहीं देखी तो आपको यहाँ जरूर आना चाहिए।

पहुचने का तरीका

  • अगर आप प्लेन से सफर करना चाहते हो तो नजदीकी एयर Platform जौली ग्रांट एअरपोर्ट है। जो की देहरादून में है। जहा से ग्वालदम 210 किमी है।
  • अगर आप ट्रेन से आना चाहते हो तो काठगोदाम से नजदीकी ट्रेन से आ सकते है यहाँ से 180 किमी के ग्वालदम लिए है।  यहाँ से लोकल टैक्सी या बस से यहाँ आ सकते हो।

पाचवी डेस्टिनेशन 

मेरी आखरी और लास्ट डेस्टिनेशन की बात करे तो ये चारो डेस्टिनेशन का कॉम्बिनेशन है। यहाँ घना जंगल है, हिमालय के शानदार नज़ारे है, आस – पास कई झीले है। इस डेस्टिनेशन की खास बात ये है कि ये दिल्ली से सिर्फ 6 घंटे की दूरी पर है इस डेस्टिनेशन का नाम रामगढ है। जी हा दोस्तों ये शोले फिल्म का रामगढ़ नहीं ये उत्तराखंड के नैनीताल जिले का रामगढ़ है।

रविन्द्रनाथ टैगोर और प्रसिद्ध कवेत्री महादेवी वर्मा से जुडी ये जगह 

भारत के राष्ट्रगान लिखने व नोबेल पुरुस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर भी यहा की गहरी शांति और प्राकृतिक खूबसूरती को महसूस कर चुके है। रामगढ को लेखको की भूमि भी कहा जाता है। हिंदी साहित्य की कवेत्री महादेवी वर्मा ने भी इस जगह ने बहुत ही गहराई से प्रभावित किया था। इनका यहाँ पर घर भी था। आज उनका घर महादेवी वर्मा संग्रालय के नाम से प्रसिद्ध है।

रामगढ़ अगर जाना जाता है तो वो अपने शांत वातावरण के नाम से जाना जाता है। क्यूंकि प्रकृति यहाँ अपने सबसे बेहतरीन रूप में झलकती है। रविन्द्रनाथ टैगोर के नाम पर एक पहाड़ी का नाम यहा पर टैगोर पहाड़ी रखा गया है जो की यहा इसे सूर्य उदय और सूर्य पस्त होने का नज़ारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। ऐसा लगता है कि किसी पेंटर ने इसकी पेंटिंग बना कर यहा रख दी हो। जो लोग फोटोग्राफर भी ना हो वो भी ना चाहते हुए भी इस नज़ारे को कैद करना चाहता हो।

उत्तराखंड के ये 5 हिल स्टेशन

यहाँ की लाइब्रेरी

यहाँ एक छोटी सी लाइब्रेरी भी है जिसको रामगढ़ लाइब्रेरी के नाम से भी जाना जाता है। इस लाइब्रेरी का माहौल ऐसा है की जो पढ़ने के शौक़ीन ना हो वो भी यहा पढ़ने लग जाता है। यहाँ से हिमालय की नंदा देवी और त्रिशूल जैसी चोटिया साफ दिखाई देती है।

बगीचों का संगम

आप यहाँ आडू, पूलम, नाशपति, खुमानी और सेब जैसे फलो के कई बगीचे देखने को मिल जाते है। फ़रवरी और मार्च में इन पेड़ो पर फूल खिलने लगते है जिससे यह घाटी रंग बिरंगी फूलो से ढक जाती है। जिससे यहाँ का नज़ारा बेहद ही खूबसूरत लगाती है।

वाटर फॉल का नज़ारा

यहाँ से दूर 15 किमी पर भालू गाड़ वाटर फॉल Adventure देखने को मिल जाता है।

  • 20 किमी की दूरी पर आप मुक्तेश्वर पहुच सकते है
  • भीम ताम, नैनीताल और नकोचिया यहाँ से ज्यादा दूर नहीं है।
  • यहाँ ठण्ड के मौसम में काफी बर्फ बारी होती है।

आने का रास्ता

  • नजदीकी हवाई अड्डा पन्त नगर यहाँ से 75 किमी की दूरी पर है जहा से आप आराम से यहाँ पहुच सकते हो
  • ट्रेन का सफ़र काठ गोदाम के बाद मात्र 45किमी पर है। यहाँ से लगातार टैक्सी और बस चलती रहती है।

दोस्तों मैंने आपको उत्तराखंड की उन जगहों के बारे में बताया जो शायद आपने सुने भी नहीं होगी और अगर सुने भी हो तो उतराखंड में कुछ ऐसी जगह और भी है जो अभी तक Unexplored है। पहाड़ी सुविधा के साथ जुड़े रहे हम आपको कुछ ऐसे ही रोचक जगहों के बारे में बताते रहेंगे। आप यह लेख अपने दोस्तों को भी शेयर जरूर करे।

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