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लड़कियों के रैंप वॉक पर हिंदू संगठन ने काटा बवाल, ऋषिकेश में दीपावली मेले की तैयारियों को लेकर मचा हंगामा

लड़कियों के रैंप वॉक पर हिंदू संगठन ने काटा बवाल

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ऋषिकेश (Pahadi Suvidha Uttarakhand News): तीर्थनगरी ऋषिकेश में लड़कियों के रैंप वॉक पर हिंदू संगठन ने काटा बवाल। लायंस क्लब ऋषिकेश रॉयल द्वारा आयोजित होने वाले दीपावली मेले की तैयारियों के दौरान यह मामला तूल पकड़ गया। आयोजन के दौरान पश्चिमी वस्त्रों में रैंप वॉक की तैयारी कर रही युवतियों को देखकर हिंदूवादी संगठन ने विरोध दर्ज कराया, जिससे माहौल गरमा गया।

लड़कियों के रैंप वॉक पर हिंदू संगठन ने काटा बवाल: आयोजन का उद्देश्य और विवाद की शुरुआत

जानकारी के अनुसार, लायंस क्लब ऋषिकेश रॉयल द्वारा 4 अक्टूबर को श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज के खेल मैदान में भव्य दीपावली मेले का आयोजन किया जाना है। इस कार्यक्रम के तहत “मिस ऋषिकेश” प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसकी तैयारियां शहर के देहरादून मार्ग स्थित एक होटल में चल रही थीं।

इसी दौरान जब राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राघवेन्द्र भटनागर को पता चला कि युवतियां पश्चिमी वस्त्रों में रैंप वॉक की तैयारी कर रही हैं, तो वह कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंच गए।
वहीं से शुरू हुआ यह विवाद, जब उन्होंने इसे “तीर्थनगरी की मर्यादा और हिंदू संस्कृति के खिलाफ” बताते हुए विरोध दर्ज कराया।

होटल में हुआ हंगामा, दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक

संगठन के लोगों ने आयोजकों से कहा कि ऋषिकेश जैसे धार्मिक स्थल पर पश्चिमी परिधान और कम वस्त्रों में मॉडलिंग करना अनुचित है। इस बीच होटल मालिक के पुत्र अक्षत गोयल ने मौके पर पहुंचकर संगठन के कार्यकर्ताओं से अभद्रता की, जिससे मामला और बढ़ गया।

स्थिति इतनी बिगड़ गई कि बीच-बचाव के लिए कई लोगों को आगे आना पड़ा।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि आयोजकों ने इस इवेंट में भारतीय संस्कृति और उत्तराखंडी परिधानों को नजरअंदाज कर दिया था। युवतियां पश्चिमी कपड़ों में रैंप वॉक करती नजर आईं, जिससे स्थानीय लोग नाराज हो गए।

हिंदू संगठन का बयान: “तीर्थनगरी की संस्कृति का अपमान”

राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राघवेन्द्र भटनागर ने कहा —

“ऋषिकेश हिंदू आस्था का केंद्र है। सनातन धर्म महिलाओं को पूरे वस्त्रों में रहने की प्रेरणा देता है। कम वस्त्रों में रैंप वॉक करना हमारी संस्कृति के खिलाफ है।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन तीर्थनगरी की पहचान को ठेस पहुंचा सकते हैं और पर्वतीय क्षेत्रों की बेटियों के संस्कारों को प्रभावित करते हैं।
भटनागर ने युवतियों को समझाने की कोशिश भी की कि इस तरह के प्रदर्शन धार्मिक शहरों की गरिमा को कम करते हैं।

आयोजकों का पक्ष: “लड़कियों को आगे बढ़ने का अवसर”

दूसरी ओर, लायंस क्लब ऋषिकेश रॉयल के प्रेसिडेंट पंकज चंदानी ने कहा कि यह आयोजन किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं और युवतियों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

उनके अनुसार,

“हमारा उद्देश्य बेटियों को आत्मविश्वास देना और समाज में उन्हें एक पहचान दिलाना है। हमने किसी की संस्कृति का अपमान करने का इरादा नहीं रखा है।”

निष्कर्ष: संस्कृति बनाम आधुनिकता की बहस

लड़कियों के रैंप वॉक पर हिंदू संगठन ने काटा बवाल — यह मामला एक बार फिर उस बहस को जन्म देता है जिसमें भारतीय परंपरा और आधुनिक सोच के बीच टकराव सामने आता है।
एक ओर संगठन इसे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन मान रहे हैं, वहीं आयोजक इसे महिला सशक्तिकरण और अवसर प्रदान करने की पहल बता रहे हैं।

ऋषिकेश जैसे धार्मिक स्थल में ऐसे आयोजनों को लेकर भविष्य में भी विवाद की संभावनाएं बनी रह सकती हैं।
Pahadi Suvidha आपको ऐसे ही उत्तराखंड से जुड़े समाचार, संस्कृति और समाज से जुड़ी खबरें सटीक रूप में उपलब्ध कराता रहेगा।

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