पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) pahadishuvidha.com:
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार हमला उत्तराखंड की घटना लगातार गहराता जा रहा है। शनिवार को पोखड़ा ब्लॉक के श्रीकोट गांव गुलदार हमले मे एक छोटी बच्ची रिया, जिसकी उम्र मात्र 4 साल की बताई जा रही है, उसे रात 13 सितंबर को एक गुलद्दार ने अपना निवला बना दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। साथ ही लोगों मे दहशत भी फैल गई है।
गुलदार हमला उत्तराखंड: मासूम रिया की मौत से गांव में आक्रोश
घटना के बाद श्रीकोट गांव सहित आस-पास के इलाकों में ग्रामीणों का आक्रोश प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग और प्रशासन ने समय रहते वन्यजीवों के आतंक पर काबू पाने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
पत्रकार महिपाल पटवाल ने अपने फेसबुक चैनल के माध्यम से इस मामले को उठाया और नेताओं पर सीधा निशाना साधा। उनका कहना है कि –
“नेता चुनाव के वक्त तो पहाड़ों के गांव-गांव वोट मांगने पहुंच जाते हैं, लेकिन जब गांव किसी आपदा या इस तरह की त्रासदी से जूझ रहा होता है तो वही नेता कहीं दिखाई नहीं देते।”
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ग्रामीणों का कहना है उत्तराखंड मानव-वन्यजीव संघर्ष अब आम होता जा रहा है। श्रीकोट गांव में हुए गुलदार हमले ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
साथ ही ग्रामीणों का कहना ये भी है कि नेताओं और प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा हमेशा साधारण परिवारों को ही भुगतना पड़ता है। साथ ही ग्रामीणों द्वारा प्रशासन को सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि इस मामले को सुधारा जाए।
मासूम रिया का जन्मदिन बना मातम
हाल ही में रिया का 16 सितंबर को जन्मदिन था। रिया के पिता जितेंद्र और माता सपना रोज़गार की तलाश में मुंबई रहते हैं वे अपने गाँव मे कुछ दिन बिताने आए थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि गांव में उनकी मासूम बिटिया के साथ इतना बड़ा हादसा घट जाएगा।
गांव के लोग बताते हैं कि रिया अभी जीवन को समझ भी नहीं पाई थी, और इतनी कम उम्र में उसकी असामयिक मौत ने पूरे गांव को हिला कर रख दिया।
थलीसैन में भी भालू का आतंक
यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में थलीसैन क्षेत्र में भी एक भालू ग्रामीणों पर आतंक मचाया था, जिससे वहां के लोग भयभीत हो गए थे। तब स्थानीय मंत्री जी ने “Shoot and Shout” का आदेश जारी किया था। श्रीकोट गांव के ग्रामीण भी अब उसी तरह की सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
बड़ा सवाल: समाधान क्या है?
अब प्रशासन और वन विभाग के सामने यह सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इस गुलदार को लेकर क्या कदम उठाया जाए।
- क्या इसे पकड़कर किसी अन्य जंगल में छोड़ा जाना चाहिए?
- या फिर इसे खत्म करने के लिए “Shoot and Shout” का आदेश दिया जाए?
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस गुलदार को पकड़ा नहीं जाता, तब तक गांव के लोग भय में जीते रहेंगे। साथ ही उन लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन कुछ नहीं कर पा रही है तो उन्हे गुलदार मरने का आदेश जारी करे।
निष्कर्ष
पहाड़ी इलाकों में गुलदार हमला उत्तराखंड मे मानव-वन्यजीव संघर्ष कोई नई बात नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ती घटनाएँ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं। मासूम रिया की मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक पहाड़ के लोग इस भय के साए में जीते रहेंगे।
👉 स्रोत: यह समाचार महिपाल पटवाल (पत्रकार) के फेसबुक चैनल पर साझा की गई जानकारी और स्थानीय ग्रामीणों के बयान पर आधारित है।
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