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जसवंतगढ़ जिला बनाने की मांग तेज, क्यों उठ रही है यह आवाज़

जसवंतगढ़ जिला

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कर्नल राजदर्शन सिंह रावत (संघर्ष समिति के अध्यक्ष) और कर्नल रामरतन नेगी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाए है कि जसवंतगढ़ जिला को लेकर उनकी अनदेखी की जा रही है। इस विषय पर सयोजक आर. पी. ध्यानी का कहना है कि वे देहरादून मे राज्यपाल से मुलाकात की जा चुकी है और कई नेताओं को ज्ञापन भी सौंपा गया है। इस दौरान महासचिव आलम सिंह भी वहा शामिल रहे। 

आखिर क्यों बढ़ी जसवंतगढ़ जिला बनाने की मांग?

धुमाकोट और आसपास के कई गाँव प्रशासनिक दृष्टि से पौड़ी जिले से जुड़े हुए हैं, लेकिन इन क्षेत्रों के लोगों को किसी भी सरकारी कार्य के लिए 100 किमी से अधिक दूरी तय कर पौड़ी जाना पड़ता है।

 इससे आम जनता का समय और धन दोनों खर्च होते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस दौरान कई बार उन्हें मध्यस्थों का सहारा लेना पड़ता है, जो अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालते हैं। यही कारण है कि लोग वर्षों से अलग जिले की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन और प्रयास

जसवंतगढ़ जिला को लेकर पहले भी रामगंगा जिला, धुमाकोट जिला और बीरोखाल जिला के नाम से जैसे कई आंदोलन चलाए गए। अब यह आंदोलन जसवंतगढ़ के नाम से चल रहा है।  नैनीडांडा, रिखणीखाल, बीरोखाल, पोखड़ा, थैलीसैण और अल्मोड़ा के सल्ड ब्लॉक को मिलाकर जसवंतगढ़ जिला बनाने की मांग उठाई है। 

आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि प्रशासनिक विकेंद्रीकरण होगा तो जनता को अधिक सुविधाएं मिलेंगी और विकास की गति तेज होगी।

जसवंतगढ़ जिला

कौन हैं जसवंत सिंह, जिनके नाम पर उठी जिला की मांग?

जसवंतगढ़ का नाम शहीद जसवंत सिंह रावत के सम्मान में रखा गया है। जसवंत सिंह का जन्म बीरोखाल ब्लॉक के गाँव बांद्यूं में वर्ष 1941 में हुआ। वे भारतीय सेना में भर्ती हुए और 1962 के भारत-चीन युद्ध  में 72 घंटे तक अकेले 300 चीनी सेनाओ का सामना किया।

उनकी  इसी वीरता के कारण उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। स्थानीय लोग मानते हैं कि जसवंतगढ़ जिला बनाकर उनकी शहादत को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।

प्रशासन की स्थिति

जिला बनाने की मांग पर डीएम मंगेश घिनडियाल की ओर से एक पत्र रेवेन्यू डिपार्टमेंट को फॉरवर्ड किया जा चुका है और इस पर कार्यवाही जारी है। वहीं, इस आंदोलन में कई जनसभाएं और ग्राम भ्रमण रैलियां भी निकाली जा चुकी हैं।

धुमाकोट तहसील में मिल सकती है शुरुआत

पहाड़ी सुविधा ने भूतपूर्व प्रधानाचार्य गबर सिंह से बात करने पर उनका मानना है कि फिलहाल धुमाकोट तहसील के भवन पर्याप्त हैं। ऐसे में जिला बनने की स्थिति में इसका प्रारंभिक संचालन धुमाकोट से ही संभव हो सकते है। बाद में ज़रूरत पड़ने पर इसका विस्तार अन्य स्थानों पर भी किया जा सकता है।

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जनता की भागीदारी से भी पहाड़ी सुविधा अपील करता है

यदि हर वर्ग जैसे स्थानीय बुजुर्गों, युवाओं और विद्यार्थि इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले लेते है, तो जसवंतगढ़ जिला अपने अस्तित्व में आ सकता है। 

“पहाड़ी सुविधा” का दृष्टिकोण

पहाड़ी सुविधा के माध्यम से हम हमेशा उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और स्थानीय मुद्दों को आवाज़ देने का प्रयास करते हैं। जसवंतगढ़ जिला बनाने की मांग सिर्फ प्रशासनिक सुविधा ही नहीं बल्कि स्थानीय जनता के आत्मसम्मान और शहीद जसवंत सिंह की वीरता से भी जुड़ी हुई है।

निष्कर्ष

जसवंतगढ़ जिला बनाने की मांग वर्षों से चली आ रही है। यह सिर्फ दूरी कम करने की ज़रूरत नहीं बल्कि क्षेत्र के विकास, पारदर्शिता और शहीद जसवंत सिंह को सम्मान देने का भी प्रतीक है। अब देखना होगा कि सरकार इस दिशा में कितनी जल्दी कदम उठाती है।

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