Uttarakhand Latest News: पौड़ी गढ़वाल के नैनीडांडा ब्लॉक में 2001-2002 में एक स्टेडियम का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन वह अधूरा रह गया। बाद में जब इस स्टेडियम के लिए नया बजट प्रस्तावित हुआ, तो स्थानीय स्तर पर यह चर्चा शुरू हो गई कि इसे धूमाकोट स्थानांतरित किया जा रहा है। इसी के विरोध में नैनीडांडा स्टेडियम विवाद से लोगों ने एक सांकेतिक धरना आयोजित किया।
धरने के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है, न कि किसी क्षेत्रीय विवाद को जन्म देना।
अधूरे नैनीडांडा स्टेडियम विवाद का इतिहास और निर्माण कार्य
जब नैनीडांडा स्टेडियम का कार्य प्रारंभ हुआ था, तो स्थानीय स्तर पर कार्यभार देवेंद्र भारती जी के पास था, जो उस समय मैटेरियल और लेबर सप्लायर के रूप में जुड़े थे।
भारती जी ने पहाड़ न्यूज 24 पर बताया कि—
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“जब स्टेडियम का निर्माण चल रहा था, तब शुरुआत में किसी और ठेकेदार को यह काम दिया गया था। लेकिन जब वह ठेकेदार काम पूरा नहीं कर पाया, तो भुवन चंद्र खंडूड़ी जी ने मुझे यह काम सौंपने का निर्णय लिया। मैंने एक सप्ताह का समय मांगा और उटिंडा व मोक्षण जैसे गांवों से प्रस्ताव पास कराकर कार्य शुरू किया।”
भारती जी आगे बताते हैं कि उस समय यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निगम के अधीन था।
“मैंने अपने दस्तावेज निगम को सौंपे और कार्य शुरू किया। लेकिन यह कहना कि ‘भारती जी पैसा खा गया’, यह केवल बदनाम करने की कोशिश है। उस समय न कोई ठोस टेंडर प्रक्रिया थी, न बॉन्डिंग। जितना पेमेंट होता था, उतना काम कराया जाता था।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि—
“यह स्टेडियम ही नहीं, बल्कि यहां का PWD बंगला और टूरिस्ट हाउस का बजट भी बाद में दूसरी जगह चला गया। जिस विकास की शुरुआत यहां से हुई थी, वह अधूरी रह गई।”
इस पूरी पृष्ठभूमि से स्पष्ट है कि नैनीडांडा स्टेडियम विवाद केवल आज का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वर्षों से अधूरी विकास योजनाओं की श्रृंखला का हिस्सा है।
ऐतिहासिक पहलू
भारती जी ने अपने बयान में स्वर्गीय भुवन चंद्र खंडूड़ी जी का विशेष उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि—
“खंडूड़ी जी ने नैनीडांडा ब्लॉक में टेलीफोन एक्सचेंज, गैस एजेंसी, टीवी टावर और मैदावन रोड जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं दीं। इन्हीं योजनाओं में यह स्टेडियम भी शामिल था।”
उस समय पूरे जिले में तीन स्टेडियम स्वीकृत किए गए थे —
- कोट ब्लॉक
- थैलीसैण ब्लॉक (बूगीधार)
- नैनीडांडा ब्लॉक
यह प्रोजेक्ट 2002 में चल रहा था जब एन.डी. तिवारी जी की सरकार थी।
बजट प्रावधान के तहत 10% राशि राज्य सरकार और 90% राशि केंद्र सरकार को देनी थी।
खंडूड़ी जी ने तिवारी जी से अनुरोध किया कि राज्य की 10% राशि राहत कोष से दे दी जाए, लेकिन यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ।
इसके बाद खंडूड़ी जी ने अपनी सांसद निधि से 10% राशि दी और लगभग 18-19 लाख रुपये के बजट में 120 मीटर लंबा और 50 मीटर चौड़ा स्टेडियम तैयार हुआ।
भारती जी के अनुसार—
“उस बजट का लगभग 15% हिस्सा सर्वे पर आने वाले अधिकारियों के खर्चों में चला गया। यही वजह रही कि स्टेडियम अधूरा रह गया और आज फिर वही विवाद दोहराया जा रहा है।”
स्थानीय प्रतिनिधियों की राय
इस विवाद को लेकर क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
वही पहाड़ न्यूज 24 ने मनोज मधवाल जी, जो काफलटडा के प्रधान हैं, से भी बातचीत की , और कहा –
“हमारा धूमाकोट या किसी अन्य क्षेत्र से कोई विरोध नहीं है। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि जो अधूरा नैनीडांडा स्टेडियम विवाद है उस पर कार्य चले, उसका विस्तार किया जाए। हमें विकास से मतलब है, न कि विवाद से।”
राजेन्द्र पटवाल का बयान (Facebook Post से)
इस पूरे नैनीडांडा स्टेडियम विवाद पर क्षेत्र के कनिष्ठ प्रमुख राजेन्द्र पटवाल ने अपने Facebook पोस्ट के माध्यम से अपनी राय जाहिर की है। उन्होंने लिखा –
“एक ओर हम सभी लोग मिलकर जिला बनाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग नैनीडांडा और धूमाकोट जैसे नज़दीकी ब्लॉकों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
मैं देख रहा था कि नैनीडांडा में धरना प्रदर्शन चल रहा था, जिसमें कुछ लोग यह कह रहे थे कि नैनीडांडा के स्टेडियम को धूमाकोट ले जाया जा रहा है।
मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि नैनीडांडा में जो स्टेडियम स्वीकृत हुआ था, वह 2002 में हुआ था, जिसकी लागत लगभग 35 लाख रुपये थी। उस समय मजदूरी लगभग 80 रुपये प्रति व्यक्ति थी और कार्य करने वाले भी नैनीडांडा के ही लोग थे। अब 2025 में धूमाकोट में नए स्टेडियम की स्वीकृति मिली है, तो कुछ लोगों को यह बात पच नहीं रही है कि स्टेडियम वहां क्यों बन रहा है।”
उन्होंने आगे कहा –
“जिस स्टेडियम पर 2002 में बजट खर्च हो चुका है, वह 23 साल बाद किसी और जगह नहीं बन सकता। जब खंडूड़ी जी मुख्यमंत्री थे और टीपीएस रावत जी कैबिनेट मंत्री, तब किसी ने इस अधूरे स्टेडियम की बात क्यों नहीं की? हम नैनीडांडा को किसी भी कीमत पर बांटने नहीं देंगे।”

(स्रोत: राजेन्द्र पटवाल का आधिकारिक Facebook पोस्ट)
सवाल उठते हैं…
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल विकास कार्यों में प्राथमिकता का मुद्दा है, या फिर क्षेत्रीय राजनीति की नई जंग बन गया है?
लोगों की राय दो हिस्सों में बंटी दिखाई दे रही है —
एक वर्ग चाहता है कि अधूरा नैनीडांडा स्टेडियम विवाद पूरा किया जाए, जबकि दूसरा वर्ग मानता है कि नया स्टेडियम धूमाकोट में बनना विकास के लिए जरूरी है।
Pahadi Shuvidha की राय
नैनीडांडा स्टेडियम विवाद अब केवल एक विकास परियोजना का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की भावनाओं से जुड़ गया है।
यदि क्षेत्र के प्रतिनिधि और प्रशासन आपसी संवाद से समाधान निकालते हैं, तो यह विवाद खत्म होकर विकास की दिशा में सकारात्मक कदम बन सकता है।
आखिरकार, विकास किसी एक ब्लॉक का नहीं, पूरे क्षेत्र का होना चाहिए।
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