उत्तराखंड राज्य जिस दौर से गुजर रहा है वो समय बहुत कठनयियों का समय है। यहा पर खेती सीमित है, और पलायन भी सत प्रतिशत है। आज हम पहाड़ी सुविधा उत्तराखंड पशुपालन विभाग की योजनाएं आपको उजागर करेगा जो कि ऐसे स्वरोजगारो के बारे मे बताने जा रहे है जिससे शायद उत्तराखंड मे पलायन रोकने का एक जरिया बन जाए।
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों मे सरकारी योजनाए आती तो है लेकिन सरकार द्वारा इन योजनाओं का सही ढंग से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार प्रसार नहीं किया जाता जिसके कारण यहा के लोग इनका लाभ नहीं उठा पाते। उनमे से एक योजना उत्तराखंड पशुपालन विभाग की योजनाएं है जो आप 2025-26 के तहत इन योजनाओ का लाभ ले सकते है।
वही उत्तराखंड पशुपालन विभाग के अंतर्गत कौन-कौन सी प्रमुख योजनाएं चल रही हैं चलिए हम Pahadi Shuvidha के माध्यम से हम आपको बता रहे हैं। जिससे आप कैसे घर बैठे इनका लाभ उठा सकते हैं।

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उत्तराखंड पशुपालन विभाग की योजनाएं और उद्देश्य
उत्तराखंड पशुपालन विभाग की योजनाएं और उनके मुख्य उद्देश्य:
- ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना
- पलायन को रोकना
- स्थानीय स्तर पर दूध, अंडे और पशु उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना
इन योजनाओं के माध्यम से राज्य सरकार ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ रही है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा (पौड़ी) के अनुसार, “यदि इन योजनाओं की सही जानकारी हर ग्रामीण तक पहुंचे, तो यह न केवल रोजगार सृजन का माध्यम बन सकती हैं बल्कि पलायन रोकने में भी मददगार साबित होंगी।”
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प्रमुख सरकारी योजनाओं की सारणी
नीचे दी गई टेबल में सभी योजनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी एक नजर में दी गई है:
| योजना का नाम | लक्षित वर्ग | इकाई लागत | लाभार्थी अंशदान | सरकारी सब्सिडी | विशेष बातें |
|---|---|---|---|---|---|
| गोपालन योजना (Gopalan Yojana) | अनुसूचित जाति | ₹40,000 | ₹4,000 | ₹36,000 | भविष्य में सभी जातियों के लिए खुलने की संभावना |
| बकरी पालन योजना (Bakri Palan Yojana) | SC & General | ₹70,000 | ₹7,000 | ₹63,000 | 5–11 बकरियों की इकाई, बैंक/DBT के माध्यम से |
| महिला बकरी पालन योजना (Mahila Bakri Palan Yojana) | अविवाहित/विधवा/एकल महिलाएं | ₹35,000 | ₹0 | ₹35,000 | 100% सब्सिडी, आत्मनिर्भर बनने की योजना |
| ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म योजना | सभी वर्ग | – | – | ₹45,000 + ₹15,000 | प्रति चूजा ₹15 सब्सिडी, 3000 चूजे तक |
| गो-सदन योजना (Gosadan Yojana) | सभी वर्ग | – | – | ₹80/दिन | लावारिस गायों की देखभाल, ग्रामसभा सहमति जरूरी |
| ग्राम गौसेवक योजना (Gram Gausevak Yojana) | ग्रामीण नागरिक | – | – | ₹80/दिन | निराश्रित नंदी की सेवा, 1 माह में ~₹12,400 |
| मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन | डेयरी फार्मर, बकरी, खच्चर, मुर्गी | 5 गाय/2 भैंस: ₹3.5 लाख 10 गाय/5 भैंस: ₹7.5 लाख | 10% ब्याज | 90% ब्याज सरकार द्वारा | बैंक से ऋण, 3 वर्षों तक ब्याज सहायता |
हम आपको एक – एक करके इन योजनाओ के बारे मे बता रहे है……आगे पढ़ने के लिए नीचे दिए बटन पर क्लिक करे।
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1. गोपालन योजना (Go-Palna Yojana)
गोपालन योजना वर्तमान में अनुसूचित जाति के लोगों के लिए विशेष रूप से संचालित की जा रही है। भविष्य में सरकार की योजना है कि इसे सभी जातियों के लिए खोल दिया जाएगा।
योजना का उद्देश्य
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गोपालन योजना उत्तराखंड को बढ़ावा देना और लोगों को स्थायी रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
गोपालन योजना उत्तराखंड का लाभ
- इस इकाई की कुल लागत ₹40,000 है।
- लाभार्थी को केवल ₹4,000 का अंशदान देना होता है।
- शेष ₹36,000 की धनराशि सीधे पशुपालन विभाग द्वारा प्रदान की जाती है।

पात्रता
- लाभार्थी अनुसूचित जाति का होना आवश्यक है।
- भविष्य में समस्त जातियों के लिए आवेदन की संभावना रहेगी।
आवेदन प्रक्रिया
- लाभार्थी अपने नजदीकी पशु विभाग कार्यालय या सरकारी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकता है।
- ग्रामसभा के प्रस्ताव और ब्लॉक लेवल कमेटी की स्वीकृति के बाद आवेदन को मंजूरी दी जाती है।
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2. गो-सदन योजना (Uttarakhand Gosadan Yojana)
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बेसहारा और बूढ़ी गायों की स्थिति काफी चिंताजनक है। इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने गो-सदन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत ऐसे लोगों को प्रोत्साहन दिया जाता है जो परित्यक्त गायों को संरक्षण देना चाहते हैं।
योजना का उद्देश्य:
- बेसहारा गायों को आश्रय देना।
- पशु संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना।

कैसे करें आवेदन:
इस योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है।
- ऑनलाइन आवेदन: उत्तराखंड पशुपालन विभाग की वेबसाइट पर जाकर करें।
- ऑफलाइन आवेदन: संबंधित पशुपालन अधिकारी या ब्लॉक कार्यालय में जाकर फॉर्म भरें।
महत्वपूर्ण जानकारी:
- गो-सदन चलाने के लिए विभाग द्वारा आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
- लाभार्थी के पास पर्याप्त भूमि और पशु-आश्रय स्थल होना चाहिए।
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3. बकरी पालन योजना: ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
बकरी पालन योजना (Bakri Palan Yojana) उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही एक प्रमुख पशुपालन योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार और आय के नए अवसर प्रदान करना है।
इस योजना के तहत लाभार्थी को बकरी पालन इकाई प्रदान की जाती है, जिसके माध्यम से वे अपने गांव में ही स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।
पात्रता और आवश्यक शर्तें
| शर्तें | विवरण |
|---|---|
| सदस्यता | किसी सहकारी समिति (Cooperative Group) या स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) का सदस्य होना आवश्यक है। |
| ऑनलाइन पंजीकरण | उत्तराखंड शीप एंड डेवलपमेंट बोर्ड की वेबसाइट पर निःशुल्क पंजीकरण कर सकते हैं। |
| ग्राम सभा प्रस्ताव | खुली ग्राम सभा का प्रस्ताव आवश्यक है। |
| भुगतान प्रणाली | अब विभाग द्वारा लाभार्थियों को Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से सहायता राशि दी जाती है। |

नया अपडेट (2025)
पशुपालन विभाग ने अब इस योजना में पारदर्शिता और सुगमता लाने के लिए चेक प्रणाली (Cheque System) को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
अब लाभार्थियों को उनकी सब्सिडी और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है।
यह व्यवस्था पौड़ी जनपद में पहली बार सफलतापूर्वक लागू की गई, जहाँ विभाग ने सीधे किसानों के खातों में धनराशि ट्रांसफर की।
योजना से मिलने वाले लाभ
बकरी पालन के लिए 70,000 रुपये तक की इकाई लागत निर्धारित है।
- लाभार्थी को मात्र ₹7,000 का अंशदान देना होता है।
- सरकार द्वारा ₹63,000 की सब्सिडी प्रदान की जाती है।
- लाभार्थी अपने समूह के माध्यम से बकरी पालन इकाई स्थापित कर सकता है।
| योजना का नाम | कुल लागत | लाभार्थी अंशदान | सरकारी सब्सिडी | भुगतान का तरीका |
|---|---|---|---|---|
| बकरी पालन योजना | ₹70,000 | ₹7,000 | ₹63,000 | DBT के माध्यम से सीधा ट्रांसफर |
आवेदन कैसे करें?
- इच्छुक लाभार्थी उत्तराखंड पशुपालन विभाग की वेबसाइट पर जाकर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- या फिर अपने नजदीकी CSC केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
- धुमाकोट क्षेत्र के इच्छुक उम्मीदवार सीधे Rawat 360 CSC Center, Dhumakot पर संपर्क कर सकते हैं।
- साथ ही, Pahadi Suvidha वेबसाइट के माध्यम से भी पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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3. महिला बकरी पालन योजना: आत्मनिर्भर महिला की नई पहचान
महिला बकरी पालन योजना (Mahila Bakri Palan Yojana) ग्रामीण रोजगार उत्तराखंड की एक विशेष योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और पशुपालन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
यह योजना उन महिलाओं के लिए शुरू की गई है जो अविवाहित (Unmarried) हैं, विधवा (Widow) हैं या किसी सामाजिक या पारिवारिक कारण से अनमैरिड रह गई हैं।

योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना, उनकी आर्थिक स्थिति को मज़बूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।
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पात्रता और शर्तें
| शर्तें | विवरण |
|---|---|
| लाभार्थी | केवल महिला आवेदक (अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता) |
| आर्थिक अंशदान | ₹0 (लाभार्थी को ₹1 भी नहीं देना होता) |
| ग्रामसभा प्रस्ताव | खुली ग्रामसभा से प्रस्ताव आवश्यक |
| स्वीकृति समिति | ब्लॉक स्तर की कमेटी (वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, क्षेत्र प्रसार अधिकारी, वीडियो साहब और एसडीएम द्वारा जाँच) |
| आवेदन प्रक्रिया | पूरी तरह ऑनलाइन (हार्ड कॉपी देने की आवश्यकता नहीं) |
आर्थिक सहायता
- इस योजना में लाभार्थी को 100% सब्सिडी प्रदान की जाती है।
- विभाग की ओर से बकरी पालन इकाई (Goat Unit) प्रदान की जाती है, जिसमें बकरियां और उनका रखरखाव शामिल है।
- यह योजना महिलाओं को बिना किसी आर्थिक बोझ के आजीविका का अवसर देती है।
आवेदन कैसे करें?
महिला बकरी पालन योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन मोड में किया जा सकता है।
- इसके लिए उत्तराखंड पशुपालन विभाग की वेबसाइट पर जाएं।
- या फिर अपने नज़दीकी CSC सेंटर (Common Service Center) से आवेदन करवा सकते हैं।
- जो महिलाएं धुमाकोट क्षेत्र में हैं, वे सीधे Rawat 360 CSC Center, Dhumakot से भी आवेदन कर सकती हैं।
- साथ ही, अधिक जानकारी और सहायता के लिए हमारी वेबसाइट Pahadi Suvidha पर भी संपर्क किया जा सकता है।
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4. ब्रायलर पोल्ट्री फार्म योजना: ग्रामीण युवाओं के लिए कम लागत में होगा बड़ा फायदा
ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म योजना (Broiler Poultry Farm Yojana) उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही एक खास योजना है। इस योजना के अंतर्गत युवाओ को सरकार प्रोत्साहन दे रही है जिसमे रोजगार के नए अवसर तो है ही साथ ही मुर्गी पालन करने का अवसर भी प्रदान कर रही है।
योजना के लिए पात्रता
- आवेदक को उत्तराखंड राज्य का निवासी होना चाहिए।
- आवेदन करते समय आवेदक को कम से कम 500 चूजों का बिल दिखाना होगा।
- पशु चिकित्सक अधिकारी से द्वारा सत्यापन रिपोर्ट (Verification) जो कि चूजों की सत्यापन रिपोर्ट (Verification) होगी उसे भी दिखाना होगा।
योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी
- विभाग द्वारा हर चूजे पर ₹15 की सब्सिडी दी जाती है।
- एक व्यक्ति अधिकतम एक बार मे 3000 चूजों तक पाल सकता है।
- इस प्रकार आवेदक को ₹45,000 तक की आर्थिक सहायता प्राप्त होती है।
- इसके अलावा, मुर्गी बाड़े के लिए (Poultry Shed Strengthening) सरकार द्वारा ₹15,000 की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है।

| योजना का नाम | लाभार्थी वर्ग | प्रति चूजा सब्सिडी | अधिकतम चूजे | कुल सब्सिडी | अतिरिक्त लाभ |
|---|---|---|---|---|---|
| ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म योजना | ग्रामीण किसान / युवा | ₹15 | 3000 | ₹45,000 | ₹15,000 मुर्गी बाड़े के लिए |
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योजना का लाभ ले रहे क्षेत्र
अभी हाल ही में रिखणीखाल, बीरोंखाल, नैनीडांडा, कल्जीखाल जैसे ब्लॉकों में इस योजना का दर्जनों लोग इससे आर्थिक रूप से सशक्त हो चुके हैं।
बीमारियों से सुरक्षा और पशु चिकित्सा सहायता
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ. विशाल शर्मा (पौड़ी) के अनुसार —
अब पोल्ट्री फार्म से संबंधित दवाइयां निदेशालय स्तर और जिला योजना निधि से प्राप्त की जाती हैं। विभाग अब पोल्ट्री मेडिकेशन (Poultry Medication) में भी सहायता प्रदान कर रहा है।
पौड़ी जनपद की विशेषता यह है कि यहाँ एकीकृत कुक्कुट विकास परियोजना केंद्र (IPDP – Integrated Poultry Development Project) कोटद्वार में स्थापित है, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टर तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
तकनीकी सलाह
यदि किसी किसान को मुर्गी पालन प्रबंधन, रोग नियंत्रण, या पोल्ट्री फार्म सेटअप से जुड़ी कोई दिक्कत आती है, तो विभाग के अनुभवी एक्सपर्ट डॉक्टरों से परामर्श लिया जा सकता है।
विभाग न केवल सलाह देता है बल्कि जरूरी दवाइयों और मार्गदर्शन की भी व्यवस्था करता है।
आवेदन प्रक्रिया
आवेदनकर्ता निम्न तरीकों से इस योजना में आवेदन कर सकता है –
- अपने नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) पर जाकर आवेदन करें।
- Apuni Sarkar Portal पर अपने सभी दस्तावेज अपलोड करें।
- यदि आप धुमाकोट क्षेत्र के निवासी हैं, तो Rawat 360 CSC Center (Dhumakot) से भी आसानी से आवेदन कर सकते हैं।
- इसके अतिरिक्त, आप हमारी वेबसाइट Pahadi Suvidha के माध्यम से हमसे संपर्क करके भी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
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5.ग्राम गौसेवक योजना:स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और सेवा का अवसर
ग्राम गौसेवक योजना उत्तराखंड सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक — चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं — निराश्रित (बेघर) नंदी गौवंश की सेवा कर सकते हैं।
इस योजना के अंतर्गत, ग्राम का कोई भी स्थानीय निवासी जो अपनी जमीन पर कम से कम 5 निराश्रित नंदी (गौवंश) को आश्रय दे सकता है, वह इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है।
योजना की प्रमुख शर्तें:
- आवेदक ग्राम का निवासी होना चाहिए।
- आवेदक के पास अपनी जमीन होनी आवश्यक है।
- ग्रामसभा की अनुमति/प्रस्ताव पत्र जरूरी है।
- प्रत्येक आवेदक को ₹100 का नोटरीकृत हलफनामा देना होता है जिसमें यह उल्लेख किया जाता है कि वह संबंधित नंदी की देखरेख करेगा।
- नंदी की उम्र कम से कम 6 माह या उससे अधिक होनी चाहिए।

आवेदन प्रक्रिया:
- जब आवेदन पशुपालन विभाग को प्राप्त होता है, तो सभी दस्तावेज़ों की जांच के बाद संबंधित आवेदक की फाइल पशु कल्याण बोर्ड को भेजी जाती है।
- अनुमोदन के बाद, आवेदक का पंजीकरण (Registration) किया जाता है।
आर्थिक सहायता:
- पंजीकृत गौसेवक को प्रति नंदी ₹80 प्रतिदिन की दर से आर्थिक सहायता दी जाती है।
- इस प्रकार, एक व्यक्ति को प्रति माह लगभग ₹12,400 (31 दिनों के हिसाब से) तक की राशि प्राप्त हो सकती है।
वर्तमान स्थिति (जनपद पौड़ी गढ़वाल):
वर्तमान में जनपद पौड़ी के अंतर्गत 8 ग्राम पंचायतों में ग्राम गौसेवक सक्रिय हैं, जिनमें से 6 गौसेवक पूरी तरह सक्रिय (Active) हो चुके हैं, जबकि 2 अन्य ग्रामों में भी शीघ्र ही निराश्रित नंदियों को सुपुर्द करने की प्रक्रिया चल रही है।
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6.मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन (State Livestock Mission)
मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन को स्टेट लाइवस्टॉक मिशन भी कहा जाता है। यह योजना उत्तराखंड सरकार की एक बेहद लाभकारी योजना है जिसका उद्देश्य किसानों, पशुपालकों और युवाओं को डेयरी, बकरी, भैंस या गाय पालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है।
योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर प्रदान करना है। राज्य के जो युवा डेयरी फार्मिंग या पशुपालन को व्यवसाय के रूप में शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक सुनहरा अवसर है।
योजना के तहत लाभ
मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के अंतर्गत लाभार्थी को निम्न प्रकार से ऋण और सब्सिडी का लाभ दिया जाता है –
- यदि कोई लाभार्थी 5 गाय या 2 भैंस पालन करना चाहता है तो उसे लगभग ₹3,50,000 का ऋण प्राप्त हो सकता है।
- इसी प्रकार, यदि कोई लाभार्थी 10 गाय या 5 भैंस पालन करना चाहता है, तो उसे लगभग ₹7,50,000 का ऋण दिया जाएगा।
- इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कुल ब्याज का 90% हिस्सा पशुपालन विभाग द्वारा 3 वर्षों तक वहन किया जाता है।
- लाभार्थी को केवल 10% ब्याज स्वयं जमा करना होता है।

इस प्रकार यह योजना उन पशुपालकों के लिए बहुत लाभदायक है जो सीमित पूंजी के साथ डेयरी या पशुपालन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
पात्रता
- आवेदक उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- आवेदक की बैंक में वित्तीय स्थिति सही और क्रेडिट हिस्ट्री संतोषजनक होनी चाहिए।
- आवेदक को डेयरी फार्मिंग, बकरी पालन, भैंस पालन या पशुपालन में अनुभव या रुचि होनी चाहिए।
आवेदन प्रक्रिया
मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन का आवेदन करने के लिए आवेदक को अपने निकटतम बैंक से संपर्क करना होगा।
बैंक आवेदक की पात्रता और आय की जांच के बाद ऋण स्वीकृत करेगा।
आवेदन के साथ निम्न दस्तावेज़ आवश्यक हैं –
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक
- निवास प्रमाण पत्र
- पशुपालन से संबंधित दस्तावेज़ (यदि उपलब्ध हों)
बैंक और विभाग द्वारा जांच के बाद ऋण की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेज दी जाती है।
योजना की विशेषता
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मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो अपना डेयरी फार्म शुरू करना चाहते हैं या अपने मौजूदा व्यवसाय को बढ़ाना चाहते हैं।
राज्य सरकार द्वारा ब्याज पर 90% सहायता मिलने से यह योजना आर्थिक दृष्टि से बहुत उपयोगी साबित हो रही है।
अधिक जानकारी के लिए
आप अधिक जानकारी या आवेदन से संबंधित अपडेट के लिए पशुपालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं:
👉 https://ahd.uk.gov.in/
नोट: यदि आप एक से अधिक गाय या भैंस/बकरी पालना चाहते हैं, तो भी आप राज्य पशुधन मिशन का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए अपने निकटतम पशु चिकित्साधिकारी या किसी राजकीय बैंक से संपर्क करें और आवश्यक दस्तावेज़ के साथ आवेदन करें। इस तरह अधिक से अधिक पशुपालक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
ग्रामीण रोजगार उत्तराखंड क्षेत्रों में स्वरोजगार और पशुपालन योजनाएं उत्तराखंड का सही लाभ उठाना आज की जरूरत है। Pahadi Shuvidha के माध्यम से हम आपको इन सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी प्रदान कर रहे हैं ताकि आप घर बैठे ही आवेदन कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
इन योजनाओं — गोपालन योजना, गो-सदन योजना, बकरी पालन योजना, महिला बकरी पालन योजना, ब्रायलर पोल्ट्री फार्म योजना, ग्राम गौसेवक योजना और मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन — के माध्यम से आप न केवल स्वरोजगार का अवसर पा सकते हैं बल्कि पलायन रोकने में भी योगदान दे सकते हैं।
Pahadi Shuvidha की कोशिश है कि हर ग्रामीण तक इन योजनाओं की जानकारी पहुंचे, जिससे उत्तराखंड में ग्रामीण युवा और महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें और राज्य की समृद्धि में योगदान दें। ग्रामीण रोजगार उत्तराखंड के क्षेत्रों और वहा के युवाओ के लिए एक वरदान साबित हो सकता है।
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