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देहरादून शिक्षा विभाग घोटाला: ₹3.18 करोड़ का खेल, सिस्टम में भ्रष्टाचार या लापरवाही?

देहरादून शिक्षा विभाग घोटाला

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क्या आपने कभी सुना है कि एक छोटा सा कर्मचारी करोड़ों रुपये का गबन कर जाए? जी हां, ये देहरादून शिक्षा विभाग घोटाला की फिल्मी कहानी नहीं बल्कि उत्तराखंड का असली घोटाला है जिसने पूरे शिक्षा विभाग की नींव हिला कर रख दी।

देहरादून से आई इस खबर ने अब ये बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या उत्तराखंड के शिक्षा सिस्टम में भ्रष्टाचार इतना गहराई तक बैठ चुका है कि बड़े अफसर भी अनजान बने रहे?

₹3.18 करोड़ का गबन — बच्चों के मुंह से छिना निवाला

देहरादून शिक्षा विभाग घोटाला में खुलासा हुआ है कि प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मील) और शक्ति निर्माण योजना के तहत मिले सरकारी फंड को अज्ञात खातों में ट्रांसफर किया गया।
यह घोटाला वित्त वर्ष 2023-24 से 2025 तक चलता रहा। सिर्फ दो सालों में ₹3,18,00,000 से ज्यादा की राशि गायब हो गई — और विभाग को भनक तक नहीं लगी।

देहरादून शिक्षा विभाग घोटाला

देहरादून शिक्षा विभाग घोटाला मे जांच रिपोर्ट और विभागीय हड़कंप

विभागीय जांच के मुताबिक यह गबन पूरी तरह से साबित हो गया है। रिपोर्ट में एक उपनल (Outsource) कर्मचारी को इसका मास्टरमाइंड बताया गया है।
हालांकि सवाल ये उठ रहा है कि क्या एक आउटसोर्स कर्मचारी अकेले इतना बड़ा घोटाला कर सकता है?

अफसरों की भूमिका पर उठे सवाल

देहरादून शिक्षा विभाग घोटाला मे कई विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है —

“बिना अधिकारियों की सहमति और डीडीओ पावर के ओटीपी के बिना कोई भी भुगतान संभव नहीं। ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि केवल एक उपनल कर्मचारी ही जिम्मेदार है।”

दरअसल, विभाग में इस दौरान कई बार जिला शिक्षा अधिकारी बदले गए, लेकिन उत्तराखंड के शिक्षा सिस्टम मे करोड़ों के ट्रांजैक्शन पर किसी की नजर नहीं पड़ी। इससे साफ है कि या तो लापरवाही हुई या फिर कुछ बड़े नाम भी इस खेल में शामिल थे।

शिक्षा मंत्री ने दिए SIT जांच के आदेश

इस मामले पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा—

“जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।”

अब यह मामला SIT जांच के हवाले है। सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या SIT केवल कर्मचारी तक सीमित रहेगी या सिस्टम में छिपे बड़े चेहरों का भी खुलासा करेगी।

क्या अकेला कर्मचारी इतना बड़ा घोटाला कर सकता है?

यह सबसे बड़ा सवाल है कि उत्तराखंड के शिक्षा सिस्टम मे ₹3 करोड़ से ज्यादा के ट्रांजैक्शन में बैंकिंग प्रक्रिया, ऑथराइजेशन, पासवर्ड और ओटीपी जैसे सुरक्षा स्तर होते हैं।
इसलिए यह मानना मुश्किल है कि किसी स्थायी अधिकारी की जानकारी के बिना ऐसा संभव हुआ हो।

SIT जांच से जुड़े मुख्य बिंदु

क्रमांकजांच बिंदुस्थिति
1आरोपी कर्मचारी उपनल से जुड़ाविभागीय जांच में पुष्टि
2मिड-डे मील और शक्ति निर्माण योजना में गड़बड़ीफंड अज्ञात खातों में ट्रांसफर
3अफसरों की भूमिका की जांचSIT जांच में जारी
4शिक्षा मंत्री का बयानदोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
5कुल गबन राशि₹3,18,00,000 (तीन करोड़ अठारह लाख)

लोगों की राय

जनता का कहना है कि इतने बड़े घोटाले में सिर्फ एक कर्मचारी को दोषी मानना सही नहीं है।

“बिना अधिकारी की सहमति के पेमेंट नहीं हो सकता, क्योंकि DDO पावर उनके पास होती है। इसलिए इसमें बड़े अफसरों की भूमिका भी जांच में शामिल होनी चाहिए।”

निष्कर्ष

यह देहरादून शिक्षा विभाग घोटाला का सिर्फ एक कहानी ही नहीं, बल्कि यह उत्तराखंड के शिक्षा सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। अगर इस बार दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह “सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता” बन जाएगी।
अब सबकी निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं — क्या ये गबन का असली चेहरा उजागर करेगी?


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