देहरादून। उत्तराखंड पेपर लीक मामला युवाओ के द्वारा लगतार जारी है। नाराज़ युवा अब सड़कों पर उतर आए हैं। जिसमे पहाड़ों का राही कहे जाने वाले कुलदीप भाई और UKD के उपाध्यक्ष आशुतोष नेगी जिन्होंने अंकिता भंडारी के लिये आवाज उठाई।
ये दोनों युवाओ के साथ देहरादून मे धरना प्रदर्शन मे पहुचे। कुलदीप रावत एक समाज सेवी है, जो सरकार के हर गलत फैसले के खिलाफ आवाज उठाते रहते है।
पेपर लीक पर युवाओं का गुस्सा
21 सितंबर को हुए प्रदेश में अलग-अलग जगह पर UKSSSC का पेपर हुआ, जिसमें कई युवाओं ने प्रतिभा किया और 3 घंटे के बाद पेपर लीक होने की खबर सामने आई। तो इससे युवा बेरोजगारों का गुस्सा फूट पड़ा।
और तब से लेकर अब तक युवाओ ने देहरादून मे सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन जारी रखा हुआ है।
अभी तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई। उत्तराखंड पेपर लीक मामला होने के बाद बेरोजगार संघ के अध्यक्ष ने पहले भी सरकार से 5 मांगें रखी थीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
क्या है ये 5 मांगे जानने के लिए यहा क्लिक करे।
कौन है कुलदीप रावत
कुलदीप रावत एक छोटे से गाँव से आते है, जिन्होंने बाहर ही अपनी पढ़ाई की और नौकरी भी बाहर करते है। पेशे से वे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। उसके बाबजूद भी उन्होंने अपने पहाड़ को नहीं छोड़ा।
समाज सेवा की शुरुवात उन्होंने अपने एक छोटे से चुनाव लड़ के की। भले ही उस चुनाव हार गए थे, लेकिन उनको उस हार ने उन्हे काफी अनुभव दिया जो उन्हे पहाड़ की पीड़ा को समझने के लिए काफी था।
वे पहाड़ों के लिए एक संजीवनी बूटी देने वाला करते है। कुलदीप के इस समर्पण को पहाड़ी सुविधा ही नहीं बल्कि उत्तराखंड दिल से धन्यवाद करता है।
आज वे लगातार युवाओं और आम जनता के हक की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। उसके बाद वे रुके नहीं उन्होंने ठान लिया कि उत्तराखंड के पहाड़ों के लिए कुछ करना है।
धरना स्थल की स्थिति
उत्तराखंड पेपर लीक मामला होने के बाद देहरादून में बेरोजगार युवा भूखे-प्यासे सड़कों पर डटे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार स्पष्ट जवाब और ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर नारे भी गूंज रहे हैं –
“पेपर चोर, गद्दी छोड़।”
कुलदीप रावत ने युवाओं का साथ देते हुए कहा कि अभी तक कोई भी विधायक या बड़ा नेता छात्रों से मिलने नहीं आया है। चाहे वे कांग्रेस, बीजेपी या निर्दलीय ही क्यों न हों, सब इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
सरकार का पक्ष और सवाल
आज ये सिर्फ उत्तराखंड पेपर लीक मामला राज्य तक ही सीमित नहीं बल्कि देश तक है, यहा सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री भी सवालों के घेरे मे है जो अभी तक बचते चले जा रहे है।
सरकार का दावा है कि उन्होंने नकल विरोधी कानून लागू कर दिया है और इस पर करोड़ों रुपये खर्च भी किये हैं। लेकिन उत्तराखंड पेपर लीक घटनाओं पर सरकार का जवाब कई युवाओं को अस्वीकार्य लग रहा है।
हाल ही में एक बयान में सरकार ने कहा कि “सिर्फ तीन प्रश्न लीक हुए थे।” यह बयान युवाओं के गुस्से को और बढ़ाने वाला साबित हुआ है।
विपक्ष और विधायकों की चुप्पी
चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक न तो विपक्ष और न ही अन्य विधायक इस आंदोलन में युवाओं के बीच पहुँचे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सभी दल इस मामले में एकजुट होकर चुप्पी साधे हुए हैं।
ये नेता सिर्फ विकास के नाम पर वोट तो मांग लेते है लेकिन उत्तराखंड मे विकास आज तक दिखा नहीं। ये सिर्फ उन्ही नेताओ को दिखाई देता है जो यहा से जीत कर आलीसान बंगलों मे रहने चले जाते है।
युवाओं की मांगें
- सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
- लीक हुई परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा कराया जाए।
- पारदर्शी भर्ती प्रणाली लागू हो।
- नकल विरोधी कानून को सही तरीके से लागू किया जाए।
“पहाड़ी सुविधा” की राय
यह मामला सिर्फ उत्तराखंड पेपर लीक का नहीं है बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। समाजसेवी कुलदीप रावत का कहना है कि जब तक सरकार और नेता ईमानदारी से जवाबदेही नहीं लेते, तब तक आंदोलन और तेज होगा।पहाड़ी सुविधा मानता है कि युवाओं की आवाज़ को अनसुना करना राज्य के भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
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