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उत्तराखंड में संविदा कर्मियों का नियमितीकरण फिर शुरू, 15,000 से अधिक को स्थायी सरकारी नौकरी का मौका

संविदा कर्मियों

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(Dehradun News | pahadishuvidha.com)

देहरादून। एक बार फिर संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को उत्तराखंड सरकार ने आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

प्रदेश मे इस फैसले से 15,000 से अधिक संविदा कर्मचारियों को स्थायी सरकारी नौकरी का अवसर मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती कट-ऑफ डेट को लेकर है, जिस पर फिलहाल इस प्रक्रिया में कानूनी राय ली जा रही है।

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पृष्ठभूमि: संविदा कर्मियों की स्थायी नियुक्ति का सफर

पिछले कुछ सालों से उत्तराखंड में संविदा कर्मियों का मुद्दों ने काफी सुर्खिया बटोरी है जिसमे सरकार सबसे नजदीकी निशाने पर है। जिन्होंने वादे तो कर दिए।

लेकिन सिर्फ भाषणों तक। कई संविदा कर्मी सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्वायत्तशासी संस्थाओं मे वर्षों से कार्यरत है। जिसमे कई कर्मचारी 10 से 15 साल तक की सेवा पूरी कर चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हे स्थायी नियुक्ति नहीं मिल पाई है।

2011 मे पहली नियमावली: इस नियमावली मे सरकार ने संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के लिए यह नियमावली तैयार की थी। जिसमे 10 साल की सेवा करने वाले कर्मचारी को स्थायी किया जाएगा।

लेकिन कुछ कर्मचारी उस प्रक्रिया से बाहर रह गए थे। जिससे वह प्रक्रिया आधी – अधूरी रही। 

नियमावली में बदलाव और कानूनी अड़चनें

2013 में दूसरी नियमावली: इस नियमावली मे 2011 के कर्मचारी जो बाहर रह गए थे। उनके लिए इसमे छूटे कर्मचारियों को शामिल करने की व्यवस्था बनाई गई।

फिर भी इसके बावजूद भी बड़ी संख्या में कर्मचारी नियमित नहीं हो पाए।

2016 में संशोधित विनियमितीकरण नियमावली: इस नियमावली मे कुछ संशोधन किये गए, जिसमे न्यूनतम सेवा अवधि को घटाकर 10 वर्ष से 5 वर्ष कर दिया गया। इस फैसले से कई संविदा कर्मचारियों को राहत की खबर मिली। जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।

अगस्त 2024 की कैबिनेट बैठक में मतभेद

कैबिनेट बैठक के दौरान अगस्त 2024 में प्रस्ताव रखा कि वर्ष 2018 तक जो  संविदा कर्मचारी 10 साल की सेवा पूरी कर लेंगे उन्हे नियमित किया जाए।

लेकिन कैबिनेट के कुछ सदस्य 2024 तक सेवा करने वाले सभी संविदा कर्मियों को शामिल करने के पक्ष में थे।

यही मतभेद इस प्रक्रिया को फिर से रोकने का कारण बने और प्रस्ताव को कार्मिक विभाग के पास वापस भेज दिया गया।

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मौजूदा स्थिति: विधिक राय का इंतजार

आनंद बर्द्धन जो कि अपर मुख्य सचिव कार्मिक है, ने बताया कि, नियमावली में संशोधन के लिए प्रस्ताव का परीक्षण चल रहा है। कट-ऑफ डेट को लेकर स्पष्टता लाने के लिए विधिक राय ली जा रही है।

जल्द ही संशोधित प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

राज्य के 15,000 से अधिक संविदा कर्मी इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कई कर्मचारी वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से नियमावली में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

संविदा कर्मियों के लिए इसका महत्व

यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो न केवल हजारों संविदा कर्मचारियों को स्थायी सरकारी नौकरी मिलेगी, बल्कि उन्हें वेतनमान, पेंशन और अन्य सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात संविदा कर्मियों का मनोबल भी बढ़ेगा और राज्य में रोजगार स्थिरता आएगी।

पहाड़ी सुविधा की राय

pahadishuvidha.com मानता है कि लंबे समय से सेवा दे रहे संविदा कर्मचारियों को नियमित करना न्यायसंगत कदम है। इससे प्रदेश में रोजगार के अवसर मजबूत होंगे और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।
हमारे प्लेटफॉर्म पर आपको इस मामले से जुड़े हर अपडेट समय पर मिलेंगे।

अगर आपके पास भी कोई भी संविदा कर्मियों से जुड़ी हुई खबर है आप पहाड़ी सुविधा के माध्यम से संपर्क कर सकते है। या फिर कमेन्ट मे अपनी प्रतिक्रिया जरूर शेयर करे । आपका यह कदम एक संविदा कर्मी को हौसला देगा।

निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार का यह कदम राज्य के रोजगार परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब देखना यह है कि कट-ऑफ डेट को लेकर क्या फैसला लिया जाता है और क्या इसमें 2024 तक सेवा देने वाले संविदा कर्मियों को भी शामिल किया जाता है।

अगर यह काम सरकार कर देती है तो ये उन कर्मचरियों की बहुत बड़ी जीत मानी जाएगी जो दिन रात को एक कर अपने कार्य के प्रति समर्पण रखते है। बस सरकार और विभाग पर सबकी निगहे टिकी हुई है।

सोर्स: Amar Ujala

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